गहलोत का BJP पर बड़ा हमला, देश में चल रहा है ‘अघोषित आपातकाल’?
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात को “अघोषित आपातकाल” करार दिया है। उन्होंने यह बयान बीजेपी द्वारा ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाए जाने के विरोध में दिया। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
गहलोत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा संविधान हत्या दिवस मनाना एक “बेईमान व्यक्ति का ईमानदारी पर ज्ञान देने” जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में लोकतंत्र का सबसे अधिक ह्रास हुआ है। उन्होंने भाजपा शासित केंद्र सरकार को लोकतांत्रिक संस्थानों, स्वतंत्र प्रेस और विपक्ष की आवाज़ को दबाने वाली सरकार करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा हालात को “अघोषित आपातकाल” बताते हुए कहा कि भले ही संविधान सस्पेंड नहीं किया गया हो या राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा नहीं की गई हो, लेकिन जनता के अधिकार, बोलने की आज़ादी और विपक्ष की आवाज़ को दबाने का प्रयास लगातार जारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि:
पत्रकार सवाल पूछे तो देशद्रोही कहा जाता है,
छात्र विरोध करें तो उन्हें आतंकवादी बताया जाता है,
और विपक्षी नेता सरकार का विरोध करें तो ED की कार्रवाई होती है।
गहलोत ने केंद्र सरकार पर स्वतंत्र मीडिया को नियंत्रित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने NDTV, BBC, दैनिक भास्कर और न्यूजक्लिक जैसे मीडिया संस्थानों पर छापों का ज़िक्र करते हुए कहा कि सिर्फ सरकार की आलोचना करने के कारण उन पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से मीडिया की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है।
गहलोत ने मौजूदा समय को 1975 की आपातकाल से भी अधिक गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि उस समय किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार नहीं किया गया, लेकिन आज झारखंड और दिल्ली के मुख्यमंत्री जेल में हैं। राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई और विपक्ष के 200 से अधिक नेताओं पर ED के छापे पड़े। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो नेता भाजपा में शामिल हो गए, उन पर कार्रवाई बंद हो गई।
गहलोत ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा ने कई राज्यों में लोकतांत्रिक सरकारों को गिराने का षड्यंत्र रचा। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में विधायकों की खरीद-फरोख्त कर जनमत का अपमान किया गया।
गहलोत ने केंद्र सरकार पर फोन टैपिंग और जासूसी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज लोग सामान्य कॉल करने से डरते हैं और वॉट्सऐप या फेसटाइम का सहारा लेते हैं, क्योंकि उन्हें भय है कि उनकी बातचीत कहीं रिकॉर्ड तो नहीं की जा रही।
अपने पोस्ट के अंत में गहलोत ने दो टूक कहा:
“हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। संविधान, लोकतंत्र और जनता की आवाज़ को बचाने के लिए हम लड़ते रहेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बनाकर तानाशाही से काम कर रही है और जहां विपक्षी सरकारें हैं, वहां राज्यपालों के माध्यम से हस्तक्षेप किया जा रहा है।
अशोक गहलोत के इस बयान ने एक बार फिर बीजेपी बनाम कांग्रेस की विचारधारा की लड़ाई को नई धार दी है। जहां बीजेपी ‘आपातकाल’ की याद दिलाकर कांग्रेस पर हमला कर रही है, वहीं गहलोत ने वर्तमान दौर को उससे भी भयावह बताते हुए सरकार को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। यह सियासी बहस अब और तेज होने की संभावना है।
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