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SIR in Rajasthan: राजस्थान में SIR पर ‘BJP-कांग्रेस’ आमने-सामने, गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

SIR in Rajasthan: राजस्थान में SIR पर ‘BJP-कांग्रेस’ आमने-सामने

राजस्थान में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर सूची से हटाए जा रहे हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि इस कथित घोटाले के खिलाफ कांग्रेस अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और प्रदेशभर में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे।

डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में एसआईआर की ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद कांग्रेस विचारधारा के वोटर्स के नाम कटवाने के लिए प्रिंटेड फॉर्म-7 एसडीएम, तहसीलदार और जिला कलेक्टर कार्यालयों में जमा कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 45 लाख मतदाताओं के नाम काटने की सिफारिश की गई है। डोटासरा ने सवाल उठाया कि जब बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आत्महत्या जैसी घटनाओं से जूझ रहे थे, तब मतदाता नाम जोड़ने-घटाने की समय-सीमा क्यों नहीं बढ़ाई गई। साथ ही उन्होंने तिथि बढ़ाने के फैसले को भी संदिग्ध बताया।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 15 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गई थीं, लेकिन 3 जनवरी को भाजपा के संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के राजस्थान दौरे के बाद पूरा “एजेंडा” बदला गया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के 937 बूथ लेवल एजेंट्स ने 17 दिसंबर से 14 जनवरी के बीच 211 नाम जोड़ने और 5,994 नाम काटने के आवेदन किए, जबकि कांग्रेस के 110 बूथ लेवल एजेंट्स ने केवल 185 नाम जोड़ने और दो नाम हटाने के आवेदन दिए, जिसका रिकॉर्ड चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।

डोटासरा और जूली ने यह भी आरोप लगाया कि 13 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे और मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा नेताओं के साथ चार घंटे चली बैठक के बाद गुप्त रूप से हर विधानसभा क्षेत्र में 15 से 20 हजार प्रिंटेड फॉर्म पहुंचा दिए गए। जूली ने इसे “संगठित साजिश” करार देते हुए मांग की कि इन सभी प्रिंटेड फॉर्म की फोरेंसिक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि फॉर्म कहां छपे, किसने छपवाए और किस माध्यम से जयपुर व अन्य जिलों तक पहुंचाए गए। जूली ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग भी की।

वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता कर डोटासरा के बयानों को “मनगढ़ंत” और “अफवाह फैलाने वाला” बताया। राठौड़ ने कहा कि बिना तथ्य और प्रमाण के बयान देना डोटासरा की आदत बन चुकी है और कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

राठौड़ ने स्पष्ट किया कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। कांग्रेस शासनकाल में भी कई बार मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में एसआईआर हुआ था, इसके बाद 2002, 2003 और 2004 में भी कांग्रेस सरकारों के दौरान विभिन्न राज्यों में यह प्रक्रिया अपनाई गई। ऐसे में आज इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।

डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने भी कांग्रेस के आरोपों की निंदा करते हुए कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में तय नियमों के अनुसार चल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है और हर आपत्ति की निष्पक्ष जांच की जाएगी। बैरवा ने भरोसा दिलाया कि मतदाता सूची में किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

एसआईआर को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ता टकराव अब सियासी और कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। कांग्रेस जहां इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा इसे नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अदालत और चुनाव आयोग तक और गर्माने के संकेत दे रहा है

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