राजस्थान

Chaumun Mosque controversy: चौमूं मस्जिद विवाद पर बोले बीजेपी प्रवक्ता, “डर के साए में अल्लाह की इबादत संभव नहीं”, “पत्थर खुद हटा दें तो सकारात्मक पहल होगी”

Chaumun Mosque controversy: चौमूं मस्जिद विवाद पर बोले बीजेपी प्रवक्ता

राजस्थान के चौमूं बस स्टैंड स्थित मस्जिद को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व विधायक रामलाल शर्मा के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। भोपावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

रामलाल शर्मा ने अपने बयान में इबादत और भय के माहौल को जोड़ते हुए कहा कि डर के वातावरण में की जाने वाली इबादत का अल्लाह से कोई वास्तविक संपर्क नहीं होता। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में तपस्या कर रहा हो और उसके मन में हर समय यह डर बना रहे कि कहीं शेर या भेड़िया हमला न कर दे, तो ऐसी तपस्या कभी सफल नहीं हो सकती।

इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अगर इबादत के दौरान यह आशंका बनी रहे कि पीछे से कोई वाहन टक्कर मार सकता है, तो उस स्थिति में पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ इबादत संभव नहीं होती। उन्होंने अपने बयान में कहा, “ऐसी इबादत में अल्लाह से संपर्क होता ही नहीं है।”

दरअसल, चौमूं बस स्टैंड के पास स्थित मस्जिद के आसपास पड़े पत्थरों और कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद के आसपास रखे गए पत्थरों और निर्माण सामग्री के कारण बस स्टैंड क्षेत्र में जाम की स्थिति बनी रहती है।

इसी संदर्भ में रामलाल शर्मा ने अपील करते हुए कहा कि पहले वहां दो ट्रॉली पत्थर पड़े थे, जिनमें से अधिकतर हटाए जा चुके हैं और अब केवल कुछ लढ्डे शेष हैं। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित पक्ष स्वयं इन पत्थरों को हटाकर आम जनता को राहत देता है, तो यह एक सकारात्मक और सराहनीय पहल होगी।

रामलाल शर्मा ने बस स्टैंड पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चौमूं बस स्टैंड पर रोजाना जाम लगना आम बात हो गई है, जिससे यात्रियों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उनका कहना था कि यह केवल एक धार्मिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की समस्या से जुड़ा मामला है। ऐसे में जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अतिक्रमण हटाना जरूरी है।

अपने बयान में रामलाल शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अतिक्रमण चाहे आज हटे या कल, लेकिन अंततः हटेगा ही। उन्होंने कहा कि इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए राम मंदिर आंदोलन का भी जिक्र किया।

शर्मा ने कहा कि जिस तरह राम मंदिर के निर्माण के लिए देश को करीब 500 साल तक इंतजार करना पड़ा और अंततः कानून व न्याय के आधार पर फैसला आया, उसी तरह चौमूं बस स्टैंड से जुड़े इस मामले में भी निर्णय कानून और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

रामलाल शर्मा ने यह दावा भी किया कि इस स्थल को लेकर दो अदालतें पहले ही इसे अतिक्रमण मान चुकी हैं। उनके अनुसार, तीसरी अदालत में भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अदालतों के फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी पक्षों को कानून के दायरे में रहकर समाधान निकालना चाहिए।

हालांकि, उनके इस बयान के बाद विवाद और प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों का कहना है कि रामलाल शर्मा का बयान जनहित, यातायात सुधार और कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, बस स्टैंड जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर किसी भी तरह का अतिक्रमण आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है, इसलिए इसे हटाना जरूरी है। समर्थक यह भी तर्क दे रहे हैं कि शर्मा ने किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भय के माहौल और सार्वजनिक अव्यवस्थाओं पर बात की है।

Kirti Bhardwaj

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