उत्तर प्रदेश

Dhirendra Krishna Shastri statement: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के 30 बच्चों वाले बयान पर भड़के शहाबुद्दीन, बोले: “पंडित जी को खुद भी शादी कर लेनी चाहिए”, “परिवार के मामलों पर किसी भी तरह के मजाक से बचना चाहिए”

Dhirendra Krishna Shastri statement: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के 30 बच्चों वाले बयान पर भड़के शहाबुद्दीन

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के हालिया बयान ने धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच नई बहस छेड़ दी है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के बारे में ऐसा बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मुसलमानों के 30-30 बच्चे होते हैं। इस बयान ने कई समुदायों में गहरी नाराजगी और विवाद को जन्म दिया।

इस बयान पर सबसे तेज प्रतिक्रिया आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने दी। मौलाना रजवी ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान को पूरी तरह तथ्यहीन और भड़काऊ बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान मुसलमानों के खिलाफ गलत संदेश फैलाते हैं और समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। मौलाना ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी मुसलमान के 30 बच्चे होना असंभव है और यह बात केवल अफवाहों और गलत जानकारी पर आधारित है। उन्होंने चुनौती दी कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री पूरे भारत में केवल एक ही मुसलमान दिखाएं जिसके 30 बच्चे हों।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में कहा कि देश में करोड़ों मुसलमान हैं, लेकिन किसी के भी 30 बच्चे नहीं हैं। सामान्य रूप से 6-7 बच्चों तक की संख्या स्वीकार्य हो सकती है, लेकिन 30 बच्चों की बात समाज में भड़काऊ माहौल पैदा करने वाली है। उन्होंने कहा कि धर्मगुरु होने के नाते पंडित धीरेंद्र शास्त्री को इस प्रकार के बयान देने से बचना चाहिए।

मौलाना रजवी ने कहा कि संतान होना खुदा की बड़ी नेमतों में से एक है। जो लोग संतानहीन होते हैं, उनके दर्द और पीड़ा को केवल वही व्यक्ति समझ सकता है। ऐसे लोग अक्सर दर-दर भटकते हैं, धर्मस्थलों पर जाते हैं और सूफी संतों के दरबारों में हाजिरी देते हैं। इसलिए बच्चों को लेकर मजाक या तंज करना उचित नहीं है।

मौलाना ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के प्रति अपने सम्मान को भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक धर्मगुरु हैं और उन्हें समाज में धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उनके योगदान के लिए सम्मान दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही मौलाना ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री को सलाह दी कि उन्हें खुद शादी करके बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारियों का अनुभव होना चाहिए। इससे उन्हें बच्चों और उनके पालन-पोषण के वास्तविक अर्थ का एहसास होगा।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने विशेष रूप से धर्मगुरुओं से अपील की कि वे अपनी भाषा और बयानों में संयम बरतें। उन्होंने कहा कि धर्मगुरुओं के द्वारा दिए गए भड़काऊ बयान समाज में गलतफहमियों और तनाव का कारण बन सकते हैं। इसलिए सार्वजनिक मंच पर किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

धार्मिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान केवल व्यक्तिगत दृष्टिकोण नहीं होते, बल्कि समाज में भ्रम और कट्टरता को जन्म देते हैं। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं को अपने विचारों को साझा करते समय सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए।

मौलाना रजवी ने अपने बयान में यह भी कहा कि समाज में सभी धर्मों के लोग समान सम्मान के हकदार हैं और किसी भी समुदाय के खिलाफ तथ्यहीन टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों और परिवारों को लेकर किसी भी तरह की नकारात्मक या मजाकिया टिप्पणी समाज के लिए खतरनाक हो सकती है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के इस बयान के बाद देश में धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इस विवाद पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग धर्मगुरुओं के संयमित और जिम्मेदार बयान की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि धार्मिक नेताओं को अपने सार्वजनिक बयानों में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे बयान केवल एक समुदाय को लक्षित नहीं करते, बल्कि पूरे समाज में असंतोष और विवाद को जन्म देते हैं।

इस विवाद ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी गर्म बहस को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दोहराया कि बच्चों और परिवार के मामलों पर किसी भी तरह के मजाक या तंज से बचना चाहिए। उन्होंने धर्मगुरुओं से अपील की कि वे केवल धर्म और समाज की भलाई के लिए सकारात्मक और समावेशी संदेश दें।

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