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‘मां’ ने भी क्यों नहीं सुना ‘ट्विशा’ का ‘दर्द’ ?

जब टविशा दर्द में थी, तो परिवार ‘सब ठीक हो जाएगा’ का इंतज़ार क्यों कर रहा था? आज के डिजिटल दौर में जब कोई हादसा होता है, तो सबसे पहले मोबाइल स्क्रीन अनलॉक होती है। चैट खंगाली जाती हैं, स्क्रीनशॉट वायरल होते हैं और फिर शुरू होता है सवालों का एक ऐसा सिलसिला, जिसका जवाब देने से हर कोई कतराता है। टविशा शर्मा के केस में भी ऐसा ही हुआ उनकी व्हाट्सएप चैट्स देखने के बाद कलेजा मुंह को आता है।

मौत से पहले सामने आए ट्विशा के वॉट्सऐप चैट्स में उन्होंने खुद को ससुराल में ‘फंसा हुआ’ बताया था और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे. इन चैट्स को कोर्ट ने अहम सबूत माना है ट्विशा ने अपनी मां को लिखा था, “मुझे बहुत ज्यादा घुटन हो रही है, मैं बुरी तरह फंस गई हूं।” उन्होंने आगे बताया कि किसी से बात करने का भी मन नहीं कर रहा। परिवार के मुताबिक, शादी के कुछ महीनों बाद ही ट्विशा को पति समर्थ सिंह और ससुराल वालों की तरफ से लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

एक और मैसेज में ट्विशा ने लिखा, “ये सब बहुत निर्दयी हैं मम्मी।” उन्होंने बताया कि सास और पति दोनों एक-दूसरे से सामान्य बात कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। इतना ही नहीं ट्विशा की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्होंने मां से कहा, “मुझे यहां से ले जाओ, प्लीज।”

ट्विशा ने चैट में इस बात का भी जिक्र किया कि, ट्विशा के पति उनके पिता से “नाक रगड़वाकर माफी” मांगवाना चाहते थे। परिवार की तरफ से दावा किया गया कि ट्विशा पर एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का आरोप लगाकर उन्हें गर्भपात के लिए मजबूर किया गया।
ट्विशा के परिवार का कहना है कि शव पर चोट के निशान थे और मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या की तरफ इशारा करती है।

लेकिन इन सबमें जो सबसे बड़ा, सबसे चुभता हुआ सवाल सामने खड़ा है, वो ये कि जब टविशा ने अपनी मां को अपने ससुराल की एक-एक ज्यादती, एक-एक दर्द और हर छोटी-बड़ी बात बता दी थी… तो फिर भी उसे उसी नरक में क्यों रहने दिया गया? उसे वक्त रहते वापस घर क्यों नहीं लाया गया?

टविशा की चैट्स सिर्फ शब्दों का पुलिंदा नहीं हैं, वो एक टूटती हुई लड़की की चीखें हैं। वो अपनी मां से सब कुछ शेयर कर रही थी। उसे उम्मीद थी कि जहां से वो आई है, वहां उसकी ढाल खड़ी है। लेकिन विडंबना देखिए, हमारे समाज का ताना-बाना आज भी इतना खोखला है कि बेटी के रोने की आवाज़ से ज़्यादा फिक्र ‘चार लोग क्या कहेंगे’ की होती है।

अक्सर ऐसे मामलों में माता-पिता को लगता है कि शुरुआत में थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है या वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि हर रिश्ता वक्त के साथ सुधरता नहीं, कुछ रिश्ते वक्त के साथ और ज़हरीले हो जाते हैं। टविशा के मामले में भी शायद इसी ‘ठीक होने’ के इंतज़ार ने उसकी जिंदगी की उम्मीदों को खत्म कर दिया।
हमारे देश में आज भी बेटियों को विदा करते वक्त अनजाने में ही सही, पर एक मानसिक दबाव दे दिया जाता है कि, अब वही तुम्हारा घर है, वहीं से तुम्हारी डोली उठी है और वहीं से अर्थी उठेगी। ये सोच आज के जमाने में भी कितनी खतरनाक है, टविशा की कहानी इसका जीता-जागता सबूत है।

जब एक बेटी अपनी मां को फोन या चैट पर ये बताती है कि वो खुश नहीं है, उसे प्रताड़ित किया जा रहा है, तो वो कोई शिकायत नहीं कर रही होती। वो दरअसल मदद की भीख मांग रही होती है। लेकिन हम उसे ‘धैर्य’ रखने की सलाह देकर वापस उसी दलदल में धकेल देते हैं। माता-पिता सोचते हैं कि मामला पुलिस तक न पहुंचे, समाज में बदनामी न हो, या शायद कानूनी पचड़ों से डर जाते हैं। पर क्या समाज की झूठी इज्जत किसी की जान से बढ़कर हो सकती है?

टविशा को घर न लाना सिर्फ एक परिवार का फैसला नहीं था, बल्कि उस रूढ़िवादी सोच की जीत थी जो आज भी मानती है कि शादीशुदा बेटी की जगह सिर्फ उसके ससुराल में है, चाहे वो जगह उसके लिए काल ही क्यों न बन जाए। अगर समय रहते उस चैट को सिर्फ पढ़ा न गया होता, बल्कि उस पर एक्शन लिया गया होता, टविशा को वहां से खींचकर बाहर निकाल लिया गया होता, तो आज कहानी कुछ और होती।

चैट्स के ये पन्ने अब गवाही दे रहे हैं, लेकिन उस जिंदगी को वापस नहीं ला सकते जो इस समाज की ‘लौट कर न आने’ वाली जिद की भेंट चढ़ गई। बेशक अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है… सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले में खुद नोटिस लेते हुए सुनवाई की… चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि, मीडिया पीड़ित या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न भागे और मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने दिया जाए… उन्होंने ये भी कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने से वे दुखी हैं…. वहीं, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। वहीं, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा ड्रग एडिक्ट थी…

ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी, लेकिन शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई 2026 को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई…. ट्विशा का अंतिम संस्कार 24 मई कर दिया गया….

टविशा तो चली गई और अपने पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई। लेकिन क्या हम और आप आज भी अपनी बेटियों को ये भरोसा देने के लिए तैयार हैं कि ‘कुछ भी हो जाए, तुम्हारा मायका तुम्हारे लिए हमेशा खुला है’… या फिर हम अगली किसी टविशा की चैट्स के वायरल होने और उस पर मोमबत्तियां जलाने का इंतज़ार कर रहे हैं?

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