राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम बापू को तुरंत सरेंडर करने को कहा, आजीवन कारावास की सजा बरकरार

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को किसी बड़ी राहत से इनकार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान गैंगरेप से जुड़े आरोप में उन्हें बरी कर दिया, लेकिन अन्य गंभीर धाराओं में दोषसिद्धि और सजा को यथावत रखा गया है। फैसले के बाद अदालत ने आसाराम को आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का भी निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।

डिवीजन बेंच ने सुनाया अहम फैसला

जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने आसाराम और अन्य तीन आरोपियों की अपीलों पर विस्तृत सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य इस बात को प्रमाणित करते हैं कि गंभीर आपराधिक कृत्य हुआ है और दोषसिद्धि को बरकरार रखा जाना न्यायोचित है।

गैंगरेप आरोप से मिली राहत

सुनवाई के दौरान अदालत ने गैंगरेप से जुड़े विशेष आरोपों की जांच भी की। अदालत ने पाया कि इस धारा के तहत दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसी आधार पर आसाराम को इस विशेष आरोप से राहत दे दी गई। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अन्य गंभीर आरोपों में उनकी भूमिका साबित होती है, इसलिए सजा में कोई राहत नहीं दी जा सकती।

सह-आरोपियों को मिली आंशिक राहत

इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद की अपीलों पर भी अदालत ने फैसला सुनाया। दोनों को कुछ धाराओं में राहत दी गई है, लेकिन अन्य मामलों में उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा गया है। अदालत ने कहा कि हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय की गई है, इसलिए राहत भी उसी आधार पर दी गई है।

2013 से चल रहा है मामला

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर में आसाराम के आश्रम में एक नाबालिग छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच की और आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में विशेष अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से लेकर अब तक यह मामला कई कानूनी चरणों से गुजर चुका है, जिसमें अपील, सुनवाई और अंतरिम राहत जैसी प्रक्रियाएं शामिल रही हैं।

अभी पैरोल पर बाहर हैं आसाराम

वर्तमान में आसाराम पैरोल पर जेल से बाहर हैं। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब उनकी कानूनी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। अदालत द्वारा सरेंडर के आदेश के बाद उन्हें फिर से जेल जाना होगा।

फैसले के बाद बढ़ी हलचल

हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद पूरे देश में एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर संतुलित फैसला दिया है, जिसमें कुछ आरोपों से राहत दी गई है, लेकिन मुख्य दोषसिद्धि को मजबूत रखा गया है। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक मंचों पर भी बहस तेज हो गई है।

admin

Recent Posts

चंडीगढ़ पुलिस में हुआ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

चंडीगढ़ पुलिस विभाग में एक साथ कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। उच्च स्तर…

1 minute ago

दिल्ली में क्यों नहीं रुक रहे बिल्डिंग हादसे? नियमों के बावजूद खड़ी हैं हादसों को दवात देती इमारतें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध और कमजोर इमारतों का खतरा…

2 hours ago

शाहजहांपुर: पुलिसवाले ही बन गए किडनैपर, सर्राफा व्यापारी से की रंगदारी

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला…

3 hours ago

मायावती का नया सियासी दांव! आकाश आनंद के बाद ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बड़ा संगठनात्मक बदलाव…

4 hours ago

उत्तराखंड के इन गांवों में पीलिया और डायरिया का कहर, 100 से ज्यादा बीमार, 2 की मौत

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पीलिया और डायरिया के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता…

4 hours ago

11 दिन बाद मलबे से जिंदा निकली महिला, नेपाल में चमत्कारिक रेस्क्यू

नेपाल के नुवाकोट जिले में राहत और बचाव अभियान के दौरान एक बेहद हैरान करने…

2 days ago