वाह जी वाह! हमारे माननीय नेताओं की भी क्या गजब की टाइमिंग होती है। चुनाव पास आते ही जनता की याद ऐसे आती है जैसे बरसों पुराना कोई खोया हुआ प्यार! मामला हरियाणा के हांसी का है, जहां भाजपा विधायक विनोद भयाणा साहब पूरे टोर के साथ ग्रामीणों का 10 दिन से चल रहा धरना खत्म करवाने पहुंचे थे। सोच कर गए होंगे कि थोड़ा समझाएंगे, दो-चार नए वादे चिपकाएंगे और वाहवाही लूटकर घर लौट आएंगे… लेकिन भाई साहब, वहां तो सीन ही ‘उल्टा’ पड़ गया! ग्रामीणों ने नेताजी को वो खातिरदारी पिलाई कि बेचारे सिर झुकाए ऐसे बैठे रहे जैसे क्लास में होमवर्क न करने पर कोई बच्चा बेंच पर बैठता है। इस पूरे घटनाक्रम का बकायदा वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आप कहेंगे…. “लो जी, आ गया स्वाद!”
पूरी कहानी 68 करोड़ रुपये के भाखड़ा नहर प्रोजेक्ट की है। सरकार चाहती है कि ये प्रोजेक्ट फटाफट पूरा हो, लेकिन चानौत गांव के लोग अड़ गए हैं। ग्रामीणों का सीधा सा कहना है… “बाबू जी, जब हमारे गांव के बगल से शुद्ध पानी की पाइपलाइन जा रही है, तो हमारे जलघर को सीधा कनेक्शन क्यों नहीं? हम क्यों प्यासे मरें?”
अब बात तो बिल्कुल पते की है! लेकिन सरकार है कि मंजूरी देने को तैयार नहीं। नतीजतन, पिछले 10 दिनों से काम ठप है। वैसे इस अभागे प्रोजेक्ट की किस्मत भी हमारे देश के रोड जैसी है….पहली बार: National Highways Authority of India से NOC नहीं मिली, तो काम अटक गया। दूसरी बार: पिछले साल तेज बारिश हुई, तो हांसी-बरवाला रोड टापू बन गया और काम रुक गया… तीसरी बार यानी के अब: चानौत गांव के लोग हक के लिए सड़क पर बैठ गए हैं। धरने पर बैठे ग्रामीण अनूप ने तो हद ही कर दी। उन्होंने विधायक जी के सामने ही कागज़ खोल लिया और एक-एक करके उनके 12 अधूरे वादे उनके मुंह पर ही गिना दिए। वो दृश्य देखने लायक रहा होगा… अनूप ने बताया कि, 2023 का वादा… नेताजी ने कहा था कि 15 दिन में गांव की फिरनी और श्मशान घाट के लिए फंड आ जाएगा।
आज 9 महीने बीत गए, फंड शायद अभी भी रास्ते में ही कहीं चाय-पानी पी रहा है। इतना ही नहीं, पिछली बार जब गांव डूबा था, तब खुली ड्रेन और पक्के निर्माण का वादा हुआ था। काम तो छोड़िए, किसानों को खराब फसलों का मुआवजा तक नहीं मिला…. अप्रैल में वादा था कि 4 दिन में 50 HP की मोटर खरखड़ी पहुंचेगी और एस्टीमेट चंडीगढ़ जाएगा… चंडीगढ़ शायद इतनी दूर है कि वहां फाइल पहुंचते-पहुंचते साल लग जाते हैं। ‘हर घर जल’ योजना का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार के राज में आज भी कई गांवों और ढाणियों के लोग नल के कनेक्शन को तरस रहे हैं। “विधायक जी, सीधी बात है पानी दोगे, तो ही वोट मिलेगा… वरना पूरा गांव आपके विरोध में खड़ा रहेगा….. पिछले दो साल से विधायक कोटे से चनौत गांव को फूटी कौड़ी नहीं मिली, जबकि सरपंच साहब प्रस्ताव लेकर चक्कर काटते रहे।” इतनी बेइज्जती और खरी-खोटी सुनने के बाद हमारे माननीय विधायक जी के पास सिर्फ एक ही सदाबहार बहाना बचा था… उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा “ये मेरा विषय नहीं है, मैं इस बारे में सरकार से बात करूंगा।” वाह विधायक जी, आप खुद सरकार का हिस्सा हैं, जनता ने आपको चुनकर सरकार के पास भेजा है और अब आप ही कह रहे हैं कि आप सरकार से बात करेंगे? तो फिर जनता सीधे सरकार से ही बात न कर ले, आपकी क्या जरूरत? नेताजी धरना खत्म करवाने गए थे, लेकिन जनता ने उनका ‘भ्रम’ खत्म कर दिया। अब देखना ये है कि चंडीगढ़ की फाइलें कब तक रेंगती हैं और चनौत गांव के लोगों को उनके हिस्से का शुद्ध पानी कब मिलता है। तब तक के लिए, नेताजी को ‘गेट वेल सून’!
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