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उत्तराखंड के इन गांवों में पीलिया और डायरिया का कहर, 100 से ज्यादा बीमार, 2 की मौत

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पीलिया और डायरिया के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ज्योलीकोट और इसके आसपास के कई गांवों में बड़ी संख्या में लोग बीमार बताए जा रहे हैं। अब तक 100 से ज्यादा ग्रामीणों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, इलाज के दौरान दो लोगों की मौत भी हुई है।

ज्यादा मामले ज्योलीकोट, गांजा और सरियाताल समेत आसपास के गांवों से सामने आए हैं। कई मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें नैनीताल और हल्द्वानी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बरेली और दिल्ली तक ले जाना पड़ा।

दो मरीजों की इलाज के दौरान मौत

बीमारी के बीच 26 वर्षीय नीमा जोशी की इलाज के दौरान मौत होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 16 वर्षीय किशोर जीना ने भी दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि एक किशोर का इलाज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा था, जहां उसकी मौत हुई। दो मौतों के बाद गांवों में डर का माहौल है। जिन परिवारों में लोग बीमार हैं, उनके साथ आसपास रहने वाले लोग भी स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो गए हैं।

उल्टी-दस्त से हुई शुरुआत

स्थानीय लोगों के अनुसार, शुरुआत में कई ग्रामीणों को उल्टी, दस्त, कमजोरी और दूसरी परेशानियां होने लगी थीं। पहले इसे सामान्य बीमारी मानकर स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया। लेकिन कुछ समय बाद मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। जांच के दौरान पीलिया के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई। इसके बाद एक के बाद एक आसपास के गांवों से भी बीमार लोगों की जानकारी मिलने लगी।

दूषित पानी को लेकर उठ रहे सवाल

बीमारी फैलने के बाद सबसे ज्यादा सवाल गांवों में पहुंचने वाले पेयजल को लेकर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की सप्लाई से जुड़े किसी जलस्रोत में गंदा पानी मिल गया हो सकता है। स्थानीय लोगों ने यह आशंका भी जताई है कि नैनीताल शहर की सीवर लाइन से निकलने वाला गंदा पानी किसी जलस्रोत तक पहुंचा और इसके बाद यही पानी गांवों में सप्लाई हुआ। हालांकि, अभी यह ग्रामीणों की आशंका है। बीमारी की असली वजह क्या है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी। जिस जलस्रोत में सीवर का पानी पहुंचने की आशंका थी, उसे फिलहाल वाटर सप्लाई टैंक से अलग कर दिया गया है।

पानी इस्तेमाल करने से भी डर रहे ग्रामीण

बीमारी के बढ़ते मामलों के बाद कई ग्रामीण पानी को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पेयजल स्रोत में ही गड़बड़ी है तो बीमारी को रोकना मुश्किल होगा। स्थानीय निवासी कविता जोशी के मुताबिक, गांवों में लोगों के बीच बीमारी को लेकर डर बढ़ गया है। वहीं ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं। गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं और लोगों की जांच की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल कैंप लगाकर जांच करने के बजाय घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जाए। साथ ही सभी पेयजल स्रोतों और पानी की सप्लाई लाइन से सैंपल लेकर उनकी जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि जिन परिवारों में मरीज मिले हैं, उनकी लगातार निगरानी होनी चाहिए, ताकि हालत बिगड़ने पर उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।

10 स्कूल और 5 आंगनबाड़ी केंद्र बंद

बीमारी के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने ज्योलीकोट, गांजा और सरियाताल क्षेत्र में एहतियाती कदम उठाया है। इन इलाकों के 10 स्कूल और 5 आंगनबाड़ी केंद्र एक सप्ताह के लिए बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन का यह फैसला खास तौर पर बच्चों को संक्रमण के संभावित खतरे से बचाने के लिए लिया गया है।

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