उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद राष्ट्रगीत के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा खड़े न होने पर विवाद उत्पन्न हुआ है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य राकेश प्रताप सिंह ने इस मामले को उठाया और उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद राष्ट्रगीत के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा खड़े न होने पर विवाद उत्पन्न हुआ है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य राकेश प्रताप सिंह ने इस मामले को उठाया और आरोप लगाया कि कुछ सदस्य राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े नहीं हुए। उन्होंने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए मांग की कि सीसीटीवी फुटेज की जांच कर दोषी सदस्यों को चिह्नित किया जाए। इसके बाद, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी इस आचरण की निंदा करते हुए कहा कि यह दुखद है और इसे संविधान निर्माता द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान के खिलाफ माना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा, विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें भाजपा के सदस्य श्रीकांत शर्मा ने सदन में अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुंदेली और अंग्रेजी भाषाओं में भाषण देने की अनुमति देने के लिए नियम 282 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। सदन में इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सपा के सदस्य मनोज कुमार पांडेय ने अवधी भाषा और भाजपा की सदस्य केतकी सिंह ने भोजपुरी में इसे सराहा। हालांकि, बुंदेली भाषा में किसी सदस्य ने अपना विचार व्यक्त नहीं किया।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि अंग्रेजी हमारी मातृभाषा और सांस्कृतिक भाषा नहीं है, और इसके स्थान पर संस्कृत और उर्दू को शामिल किया जाए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि नई शिक्षा नीति में हिंदी को विशेष महत्व दिया गया है और यह सुविधा केवल सुविधा के तौर पर दी जा रही है, इसे कोई थोपने की कोशिश नहीं की जा रही है।
यहां पर विरोधाभास देखा गया, जहां एक पक्ष ने अंग्रेजी के उपयोग का समर्थन किया और दूसरे पक्ष ने इसे भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की कमी के रूप में देखा।रोप लगाया कि कुछ सदस्य राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े नहीं हुए। उन्होंने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए मांग की कि सीसीटीवी फुटेज की जांच कर दोषी सदस्यों को चिह्नित किया जाए। इसके बाद, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी इस आचरण की निंदा करते हुए कहा कि यह दुखद है और इसे संविधान निर्माता द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान के खिलाफ माना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इस मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।
इसके अलावा, विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें भाजपा के सदस्य श्रीकांत शर्मा ने सदन में अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुंदेली और अंग्रेजी भाषाओं में भाषण देने की अनुमति देने के लिए नियम 282 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। सदन में इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सपा के सदस्य मनोज कुमार पांडेय ने अवधी भाषा और भाजपा की सदस्य केतकी सिंह ने भोजपुरी में इसे सराहा। हालांकि, बुंदेली भाषा में किसी सदस्य ने अपना विचार व्यक्त नहीं किया।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने इस संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि अंग्रेजी हमारी मातृभाषा और सांस्कृतिक भाषा नहीं है, और इसके स्थान पर संस्कृत और उर्दू को शामिल किया जाए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि नई शिक्षा नीति में हिंदी को विशेष महत्व दिया गया है और यह सुविधा केवल सुविधा के तौर पर दी जा रही है, इसे कोई थोपने की कोशिश नहीं की जा रही है।
यहां पर विरोधाभास देखा गया, जहां एक पक्ष ने अंग्रेजी के उपयोग का समर्थन किया और दूसरे पक्ष ने इसे भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान की कमी के रूप में देखा।
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