अप्रैल की शुरुआत से ही देश के कई राज्यों में गर्मी ने तेजी पकड़ ली है और हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। उत्तर, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में कई जगह पारा 43–44 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने भी संकेत दिया है कि निकट भविष्य में तापमान में और बढ़ोतरी संभव है।
इस तपिश के बीच मौसम को लेकर एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। ताजा अनुमानों के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून तय समय से पहले सक्रिय हो सकता है। अगर यह रुझान बना रहता है, तो मई के आखिरी दिनों में दक्षिण भारत के हिस्सों में बारिश की शुरुआत हो सकती है।
वैश्विक मौसम एजेंसियों के मॉडल इशारा कर रहे हैं कि मानसून सिस्टम इस बार जल्दी विकसित हो सकता है। आम तौर पर मानसून की पहली एंट्री अंडमान-निकोबार क्षेत्र से होती है और फिर यह मुख्य भूमि की ओर बढ़ता है। इस बार संभावना जताई जा रही है कि मई के मध्य से अंत के बीच इस क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलेगा।
हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्रों में बन रहे मौसमीय बदलाव भी इस दिशा में संकेत दे रहे हैं। नमी से भरी हवाएं तेज हो रही हैं, जिससे बंगाल की खाड़ी और आसपास के इलाकों में सामान्य से ज्यादा वर्षा हो सकती है। यही प्रक्रिया मानसून को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शुरुआती गर्मी का असर भी देखने को मिल सकता है। अधिक तापमान समुद्री हवाओं की गतिविधि को तेज करता है, जिससे मानसून के जल्दी आने की संभावना बनती है।
फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी से राहत नहीं मिली है, लेकिन अगर ये संकेत सही साबित होते हैं, तो आने वाले समय में खासकर दक्षिण भारत में मौसम बदल सकता है और लोगों को तपिश से राहत मिल सकती है।
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