Farmer holds IAS officer feet: किसान ने IAS के पैर पकड़े..
मेरठ में महिला आईएएस डॉ. दीक्षा जोशी के पैर पकड़ने वाले किसान की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है..वीडियो में किसान आईएएस के पैरों में गिरकर रोता बिलखता हुआ दिखाई दे रहा है। किसान राजीव सिवाच उर्फ भूरा ने महिला आईएएस को अपनी पूरी परेशानी बताई है। किसान का कहना है कि वह पिछले 6 साल से कोर्ट के चक्कर काट रहा है और अब थक चुका है। इसी मजबूरी के चलते उसे एसडीएम कोर्ट के बाहर बैठना पड़ा।
राजीव सिवाच ने बताया- उसका परिवार खेती पर निर्भर है। उसकी पत्नी बीनू लीवर की बीमारी से ग्रस्त है, जबकि 18 वर्षीय बेटे प्रिंस को दौरे पड़ते हैं। प्रिंस 11वीं कक्षा में पढ़ता है और खेती में मदद करता है। उसकी एक 13 वर्षीय बेटी गोरी भी है, जो आठवीं कक्षा में पढ़ रही है।
राजीव ने बताया कि मेरे पिता रविंद्र के तीन और बेटे हैं। मैं दूसरे नंबर का है। मेरे पिता ने सत्येंद्र से जमीन खरीदी थी। आरोप है कि सत्येंद्र और उसके बेटों विजेंद्र व जितेंद्र ने बेईमानी की। उन्होंने जमीन का सामने वाला हिस्सा खुद कब्जा लिया और नाली किनारे की जमीन मुझको दे दी।
राजीव के पिता रविंद्र इस मुकदमे में वादी हैं, जबकि राजीव पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले एसडीएम कोर्ट में साक्ष्य पेश किए गए थे। उस समय तत्कालीन IAS संदीप भागिया ने फैसला राजीव के पक्ष में सुनाया था। प्रतिवादी ने इस फैसले के खिलाफ अपर मंडल आयुक्त के कोर्ट में अपील की, जहां संदीप भागिया के फैसले को निरस्त कर दिया गया।
इसके बाद मामला एसडीएम सदर की कोर्ट में पहुंचा। राजीव का आरोप है कि यहां लेखपाल द्वारा उनसे रिश्वत मांगी गई। किसान का कहना है कि अधिकारी केवल पटवारी और लेखपाल की रिपोर्ट पर ही फैसला देते हैं, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
इस मामले में जिलाधिकारी डॉ. वीके द्वारा एक जांच टीम गठित कर दी गई है। यह टीम किसान राजीव द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। एसडीएम ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 तारीख दी है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आइए आपको बता देती हूं कि आखिर पूरा मामला है क्या
थाना सरूरपुर के गांव कालीना के रहने वाले किसान राजीव से लेखपाल ने 10 हजार रिश्वत मांगी थी। राजीव के पिता रविंद्र सिंह का सत्येंद्र सिंह से विवाद चल रहा था।
साल 2020 में मेरे पिता ने वाद दायर किया गया था। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संदीप भागिया ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन दूसरे पक्ष ने अपील करके उस फैसले को निरस्त करा दिया था।
अब मामला एसडीएम सदर डॉ दीक्षा जोशी की कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने संबंधित लेखपाल सुरेंद्र कुमार को जमीन की रिपोर्ट पेश करनी थी। लेखपाल ने आज रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने लेखपाल द्वारा दाखिल रिपोर्ट को सही और नियमानुसार पाया।
किसान राजीव ने बताया- इस मामले में लेखपाल ने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से भी शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब आज लेखपाल ने कोर्ट में रिपोर्ट सब्मिट की गई तो मैंने हंगामा करना शुरू कर दिया। मैं कोर्ट के बाहर ही धरने पर बैठ गया।
जब एसडीएम सदर डॉ दीक्षा जोशी मुझे समझाने आईं, तो मैने उनके पैर पकड़ लिए। दीक्षा जोशी ने मुझको पानी पिलाया और मेरी समस्या सुनी। मैं न्याय की मांग पर अड़ा रहा। इसके बाद एडीएम सिटी बृजेश सिंह मौके पर पहुंचे और किसान को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने मुझे इंसाफ दिलवाने का आश्वासन दिया है।
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