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पंजाब के फिरोजपुर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री, 216 बेटियों के सामूहिक विवाह में की शिरकत

पंजाब के फिरोजपुर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री

 

पंजाब के सीमा क्षेत्र फिरोजपुर में बुधवार को ऐसा भव्य और भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसे देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें खुशी से भर आईं। पाकिस्तान बॉर्डर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर 216 बेटियों का सामूहिक विवाह आयोजित किया गया।

इस आयोजन की विशेषता यह रही कि बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री स्वयं मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और सभी नवविवाहित जोड़ों को आर्शीवाद दिया।

पंजाब के कई जिलों में पिछले दिनों आई भारी बारिश और अचानक हुई बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की कमर तोड़ दी थी। कई लोग बेघर हो गए, कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। ऐसे हालात में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने अपनी बेटियों की शादी कराना एक बड़ी चिंता बन गई थी।

इसी पीड़ा को समझते हुए समाज के लोगों और धार्मिक संस्थाओं ने आगे कदम बढ़ाया और इन बेटियों के विवाह की पूरी जिम्मेदारी ली। बिना कोई आर्थिक बोझ डाले, बिना किसी दिखावे के—सिर्फ मानवीय संवेदना के साथ इस सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया

आपको बता दें कि इस सामाजिक पहल की आधारशिला गुरुहरसहाय कस्बे में शुरू हुए 7 दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में रखी गई। 12 से 18 नवंबर तक लगातार यज्ञ, हवन, पूजा और धार्मिक प्रवचन का कार्यक्रम चला।

देशभर से आए संतों, कथावाचकों और श्रद्धालुओं ने इसमें हिस्सा लिया और समाज सेवा की इस भावना को मजबूत बनाया। 19 नवंबर को इस विशाल धार्मिक कार्यक्रम का समापन 216 बेटियों की शादी के साथ हुआ, जिसने इसे और भी पवित्र व ऐतिहासिक बना दिया

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जब मंच पर पहुंचे तो लोगों में उत्साह चरम पर था। उन्होंने हर जोड़े को मंच पर बुलाकर आशीर्वाद दिया। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, “किसी बेटी की शादी करना सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पुण्य का कार्य है।

ऐसे आयोजन मानवता को मजबूत बनाते हैं।” साथ ही उन्होंने कहा कि, समाज को ऐसे कठिन समय में एकजुट होकर खड़े होना चाहिए, क्योंकि इसी से भविष्य सुरक्षित और संस्कारित बनता है।

शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर पहुंचे। मंडप, जयमाला, फेरे, बिदाई—हर रस्म को बड़े सम्मान और भावनात्मक माहौल में निभाया गया।
कई परिवार ऐसे थे जिन्होंने बाढ़ में अपना घर खो दिया था।

लेकिन जब उनकी बेटियां दुल्हन बनीं तो उनकी आंखों में आंसू दुख के नहीं, बल्कि राहत के थे। समाज के लोगों ने दान के रूप में गृहस्थी का पूरा सामान, कपड़े, बर्तन और अन्य आवश्यक चीजें भी उपहार में दीं। इससे हर बेटी अपने नए घर में सम्मान और सुविधा के साथ कदम रख सकेगी।

पाकिस्तान बॉर्डर से कुछ ही किलोमीटर दूर इतने बड़े पैमाने पर हुआ ये आयोजन सिर्फ धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ये एक संदेश था कि, सीमाएं भले भौगोलिक हों, लेकिन मानवता की सीमाएं नहीं होतीं।

स्थानीय आयोजकों ने कहा कि, वे भविष्य में भी ऐसे सामूहिक विवाह, राहत कार्य और सामाजिक सेवाओं को जारी रखेंगे। समाज के सहयोग से इन बेटियों का जीवन सुरक्षित और खुशहाल बने—यही इस आयोजन का सबसे बड़ा उद्देश्य था।

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