BIHAR VIDHANSABHA: मानसून सत्र का आखिरी दिन
बिहार विधानसभा(BIHAR VIDHANSABHA)का मानसून सत्र का आखिरी दिन भी खूब हंगामे से भरा रहा। विपक्ष ने एक बार फिर काले कपड़े पहनकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष का ये विरोध SIR को लेकर था। विपक्षी विधायक लगातार इसे लेकर नाराज हैं और हर दिन अलग अंदाज़ में विरोध दर्ज करा रहे हैं।
इस बार जब विपक्षी विधायक(BIHAR VIDHANSABHA)काले कपड़ों में पहुंचे तो CM नीतीश कुमार ने चुप्पी तोड़ दी और विरोध के इस तरीके पर तंज कसा और कहा, कि “हर दिन काला कपड़ा पहनकर आ जाते हैं। इससे पहले कब ऐसा देखा गया था? अब तो ये राजनीति नहीं, बल्कि ड्रामा बन गया है।“
नीतीश कुमार(BIHAR VIDHANSABHA) ने कहा कि, पहले विरोध इस तरह नहीं होता था, अब सबने मिलकर नया तरीका अपनाया है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “किसी ने कह दिया होगा कि ऐसा ही कपड़वा पहन लो, तो सब वैसे ही कपड़े पहनकर चले आते हैं। काम-काज कुछ नहीं हो रहा है, बस हंगामा चल रहा है।”
CM ने विपक्ष की एकजुटता(BIHAR VIDHANSABHA) को भी नकली बताया और कहा कि, ये सिर्फ दिखावा है। “आजकल सब अलग-अलग पार्टी वाले एक हो गए हैं, लेकिन सिर्फ हंगामा करने के लिए। न कोई समाधान सुझा रहे हैं, न कोई रचनात्मक बात कर रहे हैं।”
इसी बीच सत्ता पक्ष यानी BJP और JDU के विधायक भी एक अनोखे तरीके से विरोध जताते नजर आए। कई विधायक हेलमेट पहनकर विधानसभा(BIHAR VIDHANSABHA) पहुंचे। इसका कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें विपक्षी विधायकों से डर लगने लगा है, खासकर RJD और कांग्रेस से।
BJP–JDU विधायकों का कहना था कि, विपक्ष का रवैया अब शालीनता की सीमाएं पार कर चुका है। उनके मुताबिक, सदन(BIHAR VIDHANSABHA) में अब बहस के बजाय तनाव और डर का माहौल बन गया है। इसलिए उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से हेलमेट पहनकर विरोध जताया।
इस पूरे विवाद और हंगामे की वजह से विधानसभा (BIHAR VIDHANSABHA)की कार्यवाही बुरी तरह से प्रभावित हुई। सत्र की शुरुआत के बाद कार्यवाही सिर्फ 7 मिनट ही चल सकी और फिर भारी हंगामे के कारण उसे दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
इस तरह सत्र का आखिरी दिन (BIHAR VIDHANSABHA)भी बिना किसी ठोस चर्चा या फैसले के खत्म हो गया। सरकार और विपक्ष के बीच का टकराव इतना बढ़ गया कि असली मुद्दे पीछे छूट गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब बिहार की राजनीति में विरोध प्रदर्शन का तरीका पूरी तरह प्रतीकात्मक होता जा रहा है। कभी काले कपड़े पहनकर तो कभी हेलमेट लगाकर नेता अपनी बात कह रहे हैं।
जहां एक ओर विपक्ष सरकार को SIR जैसे मुद्दों पर घेरना चाहता है, वहीं सरकार इन विरोधों को सिर्फ “नाटक” कह रही है। नीतीश कुमार(BIHAR VIDHANSABHA) खुद इस बात को लेकर नाराज नजर आए कि विरोध के नाम पर सिर्फ कपड़ों और ड्रामे की राजनीति हो रही है।
अब सवाल ये है कि क्या आने वाले समय में बिहार की राजनीति (BIHAR VIDHANSABHA)असली मुद्दों की ओर लौटेगी? क्या नेताओं का ध्यान जनता की भलाई पर जाएगा या ऐसे प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन आगे भी चलते रहेंगे?
इस मानसून सत्र(BIHAR VIDHANSABHA) के बाद इतना तय है कि, राज्य की राजनीति में विरोध के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आ गया है। जहां पहले बातों से विरोध होता था, अब पहनावे और दिखावे से राजनीति की जा रही है।
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