बिहार: मृत मानकर परिवार ने किया बेटे का अंतिम संस्कार, 18 साल बाद वो जिंदा वापस लौटा

बिहार से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मामला मुजफ्फरपुर का है जहां एक परिवार ने जिस बेटे को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया था वो तकरीबन 18.5 साल बाद जिंदा वापस लौट आया। वहीं, जिंदा बेटे को देखकर माता-पिता सहित सभी दंग रह गए। बेटे को जिंदा देखकर मां के आंखों में खुशी साफ दिख रही थी।

बता दें कि, जिसने भी इस घटना को देखा उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर गांव, वार्ड संख्या-8 निवासी विश्वनाथ शाह और रामपरी देवी का छोटा पुत्र रौशन कुमार वर्ष 2007 में मैट्रिक परीक्षा के बाद अचानक गुमशुदा हो गया था। युवक 18 साल 5 महीने पहले लापता हुआ था।

मिली जानकारी के मुताबिक युवक 18 साल 5 महीने पहले लापता हुआ युवक अपने घर सकुशल लौट आया। जिस बेटे को परिवार ने वर्ष 2007 में मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार तक कर दिया था, वही बेटा जब अचानक एक युवा के रूप में माता-पिता के सामने खड़ा हुआ तो मानो समय ठहर गया। गलत संगत में पड़कर वह दोस्तों के साथ दिल्ली जाने के लिए निकला, लेकिन रास्ते में ट्रेन में साथियों से बिछड़ गया। मंदबुद्धि होने के कारण वह घर वापस नहीं लौट सका।

वहीं, जिसके बाद परिजनों ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला। पिता उस समय सरकारी सेवा में थे और उन्होंने हर संभव प्रयास किया, लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी और इस बीच परिवार टूट गया। आखिर में समाज और परिस्थितियों के दबाव में परिवार ने रौशन को मृत मान लिया और उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया।

दूसरी करफ रौशन छपरा में इधर-उधर भटकता मिला। वहां सेवा कुटीर से जुड़े लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया और भोजपुर के कोईलवर स्थित मानसिक चिकित्सालय में उसका इलाज कराया। इलाज के बाद काउंसलिंग के दौरान रौशन ने अपने पिता और गांव का नाम बताया। इसके बाद सेवा कुटीर, जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों ने लंबी प्रक्रिया के तहत उसके परिजनों का पता लगाया। 28 दिसंबर को सामाजिक संगठन से सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार छपरा पहुंचा। जैसे ही मां रामपरी देवी ने रौशन को देखा, उन्होंने तुरंत अपने बेटे को पहचान लिया। मां-बेटे के मिलन का वह क्षण इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 1 जनवरी को रौशन को उसके पैतृक गांव लाया गया। बेटे को जीवित देखकर मां-पिता फूट-फूटकर रो पड़े।

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