उत्तर प्रदेश

Yogi government zero tolerance policy: योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति, भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ यूपी में ताबड़तोड़ हो रहा एक्शन

Yogi government zero tolerance policy: योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस नीति

 

छेरत पुलिस लाइन में 21 नवंबर 2022 को स्थापित एंटी करप्शन थाना अलीगढ़ मंडल के चारों जिलों—अलीगढ़, हाथरस, कासगंज और एटा—में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की सुनवाई का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहाँ प्रदेश सरकार द्वारा शून्य सहनशीलता की नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है और इसी का परिणाम है कि अब तक कुल 19 सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया जा चुका है;

ये गिरफ्तारियां गोपनीय जाल बिछाकर ट्रैप कार्रवाई के माध्यम से की गईं, जिनमें कई विभागीय कर्मचारी, लेखपाल, क्लर्क, राजस्व कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अन्य संवर्ग के सरकारी कर्मचारी शामिल रहे

गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन संगठन की ओर से शासन को लिखित रूप में अनुरोध भेजा जाता है कि संबंधित आरोपी की चल-अचल संपत्तियों की जांच कराई जाए, और शासन से अनुमोदन के बाद ही उसकी विस्तृत संपत्ति जांच शुरू होती है, जबकि कुछ मामलों में शासन स्वयं भी संदेहास्पद कर्मचारियों के खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से जांच के आदेश देता है

इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर वर्तमान में कुल सात ऐसे सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति की जांच की जा रही है जिन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का संदेह है और इनमें से अधिकांश वही कर्मचारी हैं जो पूर्व में ट्रैप कार्रवाई में रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे, जबकि एक मामले में शासन से सीधे संपत्ति जांच के आदेश प्राप्त हुए थे

एंटी करप्शन टीम ने इन सातों कर्मचारियों की संपत्ति का पूरा ब्यौरा अत्यंत गोपनीय तरीके से एकत्रित कर लिया है, जिसमें बैंक खातों की जानकारी, जमीन-जायदाद, व्यावसायिक निवेश, परिजनों की संपत्तियाँ, आय के स्रोत, वाहनों का विवरण, लॉकर, सोना-चांदी, नकद लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण शामिल है

जांच में एक दरोगा के खिलाफ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और उसके खिलाफ संपत्ति जांच पूरी कर ली गई है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और रिपोर्ट में दरोगा के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए जाने पर अब उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा रही है

एंटी करप्शन थाने के इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह ने बताया कि एकत्रित किए गए सभी तथ्यों को गोपनीय रखा गया है और जांच शासन के निर्देशों तथा कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है,

साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार की किसी भी योजना का लाभ दिलाने, फाइल पास कराने, रिपोर्ट लगाने, प्रमाणपत्र जारी कराने या किसी प्रकार की सरकारी सुविधा प्रदान करने के नाम पर कोई अधिकारी या कर्मचारी सुविधा शुल्क, रिश्वत, धनराशि या पारिश्रमिक की मांग करता है तो इसकी तत्काल सूचना एंटी करप्शन थाना, छेरत को दें—इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9454402484 और 9454402485 जारी किए गए हैं तथा ई-मेल आईडी aco-aligarh.al@up.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है

उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतकर्ता का नाम पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाएगा और किसी भी प्रकार की पहचान उजागर नहीं की जाएगी ताकि लोग बिना डर और दबाव के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकें; इसके साथ ही इंस्पेक्टर ने बताया कि कई मामलों में शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई है, और कई बार शिकायतकर्ता के संकेत पर पूरी ट्रैप टीम रात-दिन सक्रिय रहकर रिश्वतखोर कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ने में सफल रही है

उन्होंने कहा कि संपत्ति जांच एक बेहद गंभीर और विस्तृत प्रक्रिया होती है जिसमें सरकारी कर्मचारी की नियमित आय, वेतन, वैध आय स्रोत और परिवार की आमदनी के अनुपात में उसकी संपत्तियों की जांच की जाती है और यदि यह पाया जाता है कि उसकी आय की तुलना में संपत्ति असामान्य रूप से अधिक है तो उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया जाता है और जांच एजेंसियाँ उसकी जब्ती, कुर्की तथा अन्य कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ती हैं

अलीगढ़ मंडल में वर्तमान में चल रही सात संपत्ति जांचों को शासन द्वारा अत्यधिक गंभीरता से लिया जा रहा है और ये सभी मामले उच्चाधिकारियों की निगरानी में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है

कि आने वाले समय में भ्रष्टाचार के मामलों पर और कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है तथा यह भी कि किसी भी कर्मचारी को यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि विभागीय या राजनीतिक संरक्षण के कारण वह जांच से बच सकता है; एंटी करप्शन संगठन लगातार अपील कर रहा है कि नागरिक अधिक से अधिक शिकायतें दर्ज कराएं ताकि भ्रष्टाचार की जड़ों को खत्म किया जा सके और प्रशासनिक तंत्र को पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाया जा सके।

Kirti Bhardwaj

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