राजस्थान

Rajsamand Government Higher Secondary School Bhava: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भावा का मामला, स्कूल में शिक्षा मंत्री के बुर्के वाले सवाल पर शुरू हुआ विवाद, स्कूल की प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने दिया मामले पर जवाब

Rajsamand Government Higher Secondary School Bhava: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भावा का मामला

 

राजस्थान के राजसमंद जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भावा में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की स्कूल विजिट के दौरान सामने आया कथित ‘बुर्का विवाद’ अब पूरी तरह से चर्चा में है, लेकिन इसी बीच स्कूल की प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने मीडिया के सामने आकर स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शिक्षा मंत्री ने स्कूल निरीक्षण के समय ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं पूछा था जिसका संबंध बुर्का या धार्मिक परिधान से हो,

बल्कि उन्होंने केवल स्कूल की यूनिफॉर्म व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी थी और उन्हें बताया गया था कि विद्यालय में सभी बच्चे निर्धारित यूनिफॉर्म में ही आते हैं; प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने यह भी बताया कि विद्यालय में एक भी मुस्लिम छात्र या छात्रा अध्ययनरत नहीं है, इसलिए बुर्के का प्रश्न उठने का कोई आधार ही नहीं बनता और न ही निरीक्षण के दौरान ऐसी कोई चर्चा हुई

प्रिंसिपल के अनुसार शिक्षा मंत्री मदन दिलावर विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई, अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्थाओं को देखकर काफी संतुष्ट थे और उन्होंने पूरे स्टाफ की प्रशंसा की थी, विशेष रूप से प्रिंसिपल सीमा गहलोत की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा था कि विद्यालय बेहद अच्छे ढंग से संचालित हो रहा है और छात्र अनुशासित हैं; मंत्री ने यह भी कहा था कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की दिशा में ऐसे प्रयास प्रेरणास्रोत हैं और भावा स्कूल की साफ-सफाई तथा शिक्षण व्यवस्था देखकर वे प्रभावित हुए हैं

उनके इस संपूर्ण दौरे के बाद माहौल सकारात्मक था, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद मीडिया के एक वर्ग में यह खबर चली कि शिक्षा मंत्री ने प्रिंसिपल से सवाल किया था कि क्या कोई छात्र स्कूल में बुर्का पहनकर आता है, और देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक वायरल हो गई, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने शिक्षा मंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया और इसे धार्मिक आधार पर अनावश्यक हस्तक्षेप बताया

लेकिन अब प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने खुलकर सामने आकर इन खबरों का पूर्ण खंडन किया है और कहा है कि यह सच्चाई से परे है, क्योंकि विद्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय से एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है, ऐसे में बुर्के की बात उठना ही निराधार है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की गलत खबरें फैलाने से न सिर्फ अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं बल्कि सरकारी कर्मचारियों को भी निशाना बनाया जाता है, जो अपने स्तर पर पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहे होते हैं

प्रिंसिपल ने कहा कि शिक्षा मंत्री के निरीक्षण के दौरान न तो कोई विवादास्पद प्रश्न पूछा गया और न ही ऐसा कोई संकेत दिया गया जिससे धार्मिक परिधान पर चर्चा होने का आधार बने, बल्कि पूरा निरीक्षण शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन को समझने पर केंद्रित था; उन्होंने बताया कि मंत्री ने स्कूल की यूनिफॉर्म के बारे में पूछताछ इसलिए की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी विद्यार्थी नियमों के अनुसार निर्धारित पहनावे में ही आते हैं, और उन्हें यह बताया गया कि स्कूल में यूनिफॉर्म व्यवस्था काफी सख्ती से लागू है

प्रिंसिपल सीमा गहलोत ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए कुछ मीडिया संस्थानों ने ऐसी खबरें चलाईं, जिनसे शिक्षा मंत्री के दौरे को अनावश्यक रूप से विवादों में घसीट दिया गया और इससे विद्यालय की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता था

उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रशासन मेहनत से काम कर रहा है, विद्यार्थी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और ऐसे समय में इस तरह की गलत खबरें फैलाना केवल सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक उद्देश्य साधने जैसा है; सीमा गहलोत ने कहा कि वास्तविकता यह है कि मंत्री स्कूल से बेहद खुश होकर गए थे और उन्होंने उन्हें तथा पूरे स्टाफ को शुभकामनाएँ दी थीं, निरीक्षण के दौरान मंत्री ने स्कूल के कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और शिक्षकों की उपस्थिति रजिस्टर तक का अवलोकन किया और उनकी अनुशासन व्यवस्था को ‘उत्कृष्ट’ बताया

यह पूरा दौरा सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुआ था, लेकिन बाद में फैली अफवाहों ने स्थिति को अलग ही मोड़ दे दिया, जिसे अब प्रिंसिपल ने तथ्यों के साथ स्पष्ट कर दिया है कि न तो बुर्के का कोई सवाल पूछा गया और न ही ऐसी कोई परिस्थिति बनी, इसलिए विवाद की कोई वजह ही नहीं थी

उन्होंने कहा कि विद्यालय में किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं है और न ही ऐसा कोई मुद्दा मौजूद था जिसे राजनीतिक रंग दिया जाए, बल्कि यह पूरा प्रकरण गलत जानकारी के आधार पर फैलाया गया और इससे विद्यालय के मेहनती शिक्षकों और छात्रों की छवि को क्षति पहुंचाई गई, इसलिए आवश्यक है कि ऐसी खबरें प्रसारित करने से पहले सत्यापन पर जोर दिया जाए ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सकारात्मक प्रयास विवादों के शोर में दब न जाएँ।

Kirti Bhardwaj

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