पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब एक गंभीर और निर्णायक स्थिति की ओर बढ़ता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ और ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की खबरों के अनुसार, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की 31वीं एक्सपीडिशनरी यूनिट (31st MEU) अब मध्य पूर्व में पहुंच चुकी है।
इसी के साथ पेंटागन ने ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी अभियान की तैयारी को भी अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह ऑपरेशन कई हफ्तों तक चल सकता है, जिसमें स्पेशल फोर्सेस के साथ-साथ पारंपरिक सेना के जवान भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस पूरी योजना पर आखिरी फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेना है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि USS Tripoli नाम का युद्धपोत करीब 2500 मरीन सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट में तैनात हो चुका है। इस जहाज पर 31st MEU के सैनिक मौजूद हैं, जिन्हें पहले जापान में तैनात किया गया था और वे ताइवान के आसपास अभ्यास कर रहे थे। करीब दो हफ्ते पहले इन्हें अचानक मध्य पूर्व भेजने का आदेश दिया गया।
USS Tripoli केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सैन्य संसाधनों से भी लैस है। इसमें ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, F-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स और समुद्र से सीधे जमीन पर हमला करने वाले एम्फीबियस उपकरण शामिल हैं, जो इसे बेहद घातक बनाते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ईरान के अंदर स्पेशल ऑपरेशन और छापेमारी जैसी कार्रवाई की योजना पर भी विचार कर रहा है। इसके लिए 82nd एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को भी अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि जमीनी कार्रवाई को लेकर अंतिम हरी झंडी अभी मिलना बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ऑपरेशन शुरू होता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है और इसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
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