Categories: विदेश

‘हवाई हमलों से ईरान युद्ध नहीं जीता जा सकता’, ट्रंप के पूर्व रक्षा मंत्री की बड़ी चेतावनी

अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि सिर्फ हवाई हमले करके ईरान के खिलाफ चल रहे तनाव या संघर्ष में जीत हासिल नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि अमेरिका को अपनी रणनीति बदलनी होगी और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहिए।

मार्क एस्पर, जो डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्री रह चुके हैं, ने कहा कि केवल बमबारी से ईरान अपना रुख नहीं बदलेगा। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान अपनी नीति नहीं बदलेगा।

आर्थिक दबाव को बताया बेहतर विकल्प

एस्पर ने कहा कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं। पहला, ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया जाए। दूसरा, उस पर इतना आर्थिक दबाव बनाया जाए कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने पर मजबूर हो जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव का असर दिखाने के लिए सिर्फ प्रतिबंध लगाना काफी नहीं होगा। उन प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना और दूसरे देशों का सहयोग लेना भी जरूरी है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत जुलाई की शुरुआत से अब तक करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है, जिससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ सकती है।

अमेरिका के लिए भी बढ़ी चिंता

मार्क एस्पर ने यह भी कहा कि लगातार सैन्य कार्रवाई से अमेरिका के हथियारों का भंडार तेजी से कम हो रहा है। पेंटागन अब तक अरबों डॉलर खर्च कर चुका है और इससे अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता चीन है। ऐसे में अगर हथियारों और गोला-बारूद का स्टॉक लगातार घटता रहा, तो भविष्य में अमेरिका के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

ईरान के साथ क्या होना चाहिए?

मार्क एस्पर का कहना है कि अमेरिका की रणनीति का लक्ष्य दो बातें होनी चाहिए— स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो। ईरान के साथ ऐसा मजबूत परमाणु समझौता हो, जो पहले हुए समझौतों से ज्यादा प्रभावी हो। वहीं, अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी माना है कि फिलहाल नए परमाणु समझौते से ज्यादा जरूरी ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

admin

Recent Posts

सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिका में प्रदर्शन, भारत सरकार से बातचीत की मांग

जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में अब अमेरिका में…

12 hours ago

15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों के लिए अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार को देश के 15 राज्यों के लिए भारी…

13 hours ago

विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान पर पीएम मोदी ने दी बधाई, स्काईरूट की सफलता से रचा नया इतिहास

भारत ने शनिवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। देश की…

15 hours ago

भारत ने रचा नया इतिहास, स्काईरूट का विक्रम-1 रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च

भारत की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास…

16 hours ago

ग्रीन कॉरिडोर और थ्री-फेज प्लान, 20 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती

जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार…

16 hours ago

BJP नेता को पुलिस ले जा रही थी, भीड़ ने फेंके अंडे, फ्लैट कब्जे के आरोपों की जांच जारी

पश्चिम बंगाल के राजारहाट-न्यूटाउन इलाके में एक बीजेपी नेता को पुलिस हिरासत में लेकर जा…

2 days ago