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देश के दो-तिहाई हिस्से पर छाए घने बादल, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

19 जुलाई को ISRO के मौसम निगरानी सैटेलाइट INSAT-3DR ने भारत की एक नई तस्वीर जारी की है। इस तस्वीर में देश का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घने मॉनसूनी बादलों से ढका हुआ दिखाई दे रहा है। इससे साफ है कि इस समय पूरे देश में मॉनसून पूरी तरह सक्रिय है।

सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा बादल छाए हुए हैं। वहीं मध्य भारत और पश्चिमी तट पर भी मॉनसूनी गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।हालांकि, हर जगह भारी बारिश नहीं होगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार केवल गहरे और ऊंचे तूफानी बादलों वाले इलाकों में ही तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना रहती है। बाकी क्षेत्रों में हल्की या सामान्य बारिश हो सकती है।

कैसे काम करता है INSAT-3DR?

INSAT-3DR, ISRO का मौसम पर नजर रखने वाला सैटेलाइट है। यह पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर ऊपर भू-स्थिर कक्षा में मौजूद है और हर 30 मिनट में भारत की नई तस्वीरें भेजता है। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर भारत मौसम विभाग (IMD) मौसम का पूर्वानुमान जारी करता है।

सैटेलाइट के इंफ्रारेड कैमरे से बादलों की ऊंचाई और तापमान का पता लगाया जाता है। जितना ठंडा बादल होगा, वह उतना ही ऊंचा और तेज बारिश वाला माना जाता है। 19 जुलाई की तस्वीरों में जम्मू-कश्मीर में -80°C तक ठंडे बादल और उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा पूर्वोत्तर में -50°C से कम तापमान वाले बादल दिखाई दिए, जो तेज बारिश और गरज-चमक का संकेत हैं।

किन राज्यों में ज्यादा असर?

मॉनसून ट्रफ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। वहीं पश्चिमी तट और मध्य भारत में भी अच्छी बारिश हो सकती है।

क्या हो सकता है असर?

  • कई शहरों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
  • नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।
  • पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा रहेगा।
  • किसानों को फसलों की सुरक्षा करने की सलाह दी गई है।
  • लोगों से मौसम विभाग की चेतावनी का पालन करने की अपील की गई है।

जलवायु परिवर्तन का असर

वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मॉनसून का पैटर्न बदल रहा है। कहीं लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है तो कहीं अचानक बहुत ज्यादा बारिश हो रही है। ऐसे में सैटेलाइट से मिलने वाला रीयल-टाइम डेटा मौसम का सटीक अनुमान लगाने में काफी मददगार साबित हो रहा है।

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