उत्तराखंड के नैनीताल शहर जो कि, खूबसूरत झीलों के लिए जाना जाता है। इस इलाके से अच्छी तरह से वाकिफ कुछ भूगर्भशास्त्रियों और इतिहासकारों ने ऐसा अनुमान लगाया है कि नैनीताल को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, उनका मानना है कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर यह शहर अब अनियंत्रित विकास, उपेक्षा और पर्यटकों के बढ़ते दबाव की वजह से काफी मुश्किलों का सामना कर रहा है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में नैनीताल को 1880 में हुए घातक भूस्खलन जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। भूविज्ञानी डॉ. भास्कर पाटनी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि, इतिहास में जाएं तो पुराना 1880 याद कीजिए 1880 के उस लाइक फेजेज को, जिसमें पूरा फ्लैट बना हुआ है, और कैसे 152 लोगों की बली चढ़ गई थी और उसी इलाके में आज पूरा मल्लीताल बसा हुआ है। आज वार्ड नंबर 8 मोस्ट वैल्युएबल है उसी पर सब बैठे हुए हैं, तो मुझे इस बात का अफसोस होता है कि हम देर किस बात की कर रहे हैं, अब इसमें क्या हम इंतजार कर रहे हैं कि उस तरह की त्रासदी दोबारा हो जाए क्योंकि हम इतने जो मकान बनाया है पहाड़ियों पर पहले तो सबसे बड़ी चीज़ कि वो बने क्यों और बन भी गए है तो अब उनका क्या ट्रीटमेंट कर रहे हैं।”
वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चेतावनी के संकेत तीन दशक पहले ही दे दिए गए थे लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत ने कहा कि, नैनीताल की जो केयरिंग कैपिसिटी थी यो समाप्त हो चुकी थी 1989 में उसी वर्ष 1989 में कार्यशाला भी हुई थी सेव नैनीताल वर्कशॉप और उसमें पूरे उत्तराखंड के विशेष रूप से नैनीताल को ध्यान में रखा गया है मीटिंग हुई थी। उसी समय में कहा गया था अब नैनीताल में निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए और अगर निर्माण कार्य किया जाए तो दो पैरेलल सिटी बनाने चाहिए और भीमताल को एक बड़ा सिटी के रूप में बनाया जाना चाहिए और दूसरा कुरबाताल। सुुप्रीम कोर्ट में भी इसका आपत्ति दी गई थी, सुुप्रीम कोर्ट ने ये कहा था कि ग्रुप हाउसिंग नहीं बननी चाहिए और इंडिविजुअल जो हैं वो सुरक्षित क्षेत्र में बननी चाहिए लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई और ग्रुप हाउसिंग अभी तक है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुधार के इरादे से कुछ कार्रवाई करने के लिए अब भी काफी समय है लेकिन अगर ऐसा नहीं किया गया, तो नैनीताल का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
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