SIR in UP: यूपी में SIR से प्रभावित परिवारों के लिए सपा की बड़ी पहल
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने, मैपिंग में गड़बड़ी और नोटिस भेजे जाने को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। खास तौर पर नोएडा विधानसभा क्षेत्र से सबसे ज्यादा गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, जहां मृत मतदाताओं के नाम सूची में शामिल होने और जीवित मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
नोएडा विधानसभा क्षेत्र में सामने आई शिकायतों के बाद समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को संगठित तरीके से उठाने का फैसला किया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर नोएडा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने मतदाताओं के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 9810735584 जारी किया है। इस हेल्पलाइन पर कोई भी मतदाता SIR प्रक्रिया से जुड़ी अपनी परेशानी दर्ज करा सकता है। पार्टी का दावा है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आ रहे हैं, जिनका नाम बिना किसी स्पष्ट कारण के ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिया गया है।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि नोएडा क्षेत्र में कई मामलों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। ड्राफ्ट लिस्ट में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनकी मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है, जबकि जो लोग नियमित रूप से मतदान करते आए हैं, उनके नाम सूची से गायब हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
इस बीच चुनाव आयोग ने भी मतदाताओं की शिकायतों को देखते हुए एक नई सुविधा शुरू की है। आयोग ने ‘बुक-ए-कॉल विद बीएलओ’ सुविधा की शुरुआत की है। इसके तहत कोई भी मतदाता चुनाव आयोग के ऐप या पोर्टल पर अपनी शिकायत या अनुरोध दर्ज करा सकता है। रिक्वेस्ट दर्ज होने के 48 घंटे के भीतर संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाता से फोन पर संपर्क कर उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगा। चुनाव आयोग का कहना है कि इस सुविधा का उद्देश्य मतदाताओं को सीधे और त्वरित सहायता प्रदान करना है।
हालांकि विपक्ष इस कदम को पर्याप्त नहीं मान रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने SIR प्रक्रिया को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बीजेपी SIR के जरिए वोटर लिस्ट में हेरफेर करना चाहती है। अखिलेश यादव का आरोप है कि बीजेपी एक बार फिर नकली वोटर बनाने में जुटी हुई है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में अभी से जुट जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को सरकार में लाने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर घर-घर जाना होगा, लोगों से संपर्क करना होगा और पार्टी की नीतियों व कार्यक्रमों के बारे में जागरूक करना होगा। उनके मुताबिक, वोटर लिस्ट में हो रही गड़बड़ियां चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गई हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अखिलेश यादव ने SIR को सीधे तौर पर एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) से जोड़ते हुए कहा कि जो काम गृह मंत्रालय का था, वही काम बीजेपी सरकार अब चुनाव आयोग के जरिए करवा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आड़ में लोगों की नागरिकता और पहचान पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी वोटर लिस्ट में लगातार खामियां सामने आ रही हैं। अखिलेश यादव के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि करीब चार करोड़ वोट हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने की कोशिश कर रही है, ताकि चुनावी फायदा उठाया जा सके।
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों में भारी अंतर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सेंट्रल इलेक्शन कमीशन के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 12.56 करोड़ मतदाता हैं। वहीं स्टेट इलेक्शन कमीशन की वोटर लिस्ट में सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही 12.69 करोड़ मतदाता दिखाए गए हैं। अगर इसमें शहरी इलाकों के मतदाताओं को जोड़ दिया जाए, तो कुल संख्या 17 करोड़ से अधिक हो जाती है।
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