मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल आने का रास्ता बंद हो चुका है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है और ऐसे में रूस कच्चे तेल की खेप को भारत की ओर मोड़ने के लिए तैयार है। वहीं, एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जल्द ही ये शिपमेंट भारत की ओर जा सकता है। जबकि, भारत के पास सिर्फ 25 दिनों का रिजर्व बचा हुआ है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय भारत के समुद्री क्षेत्र के आसपास चल रहे जहाजों में करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल मौजूद है। अगर जरूरत पड़ी तो यह तेल कुछ ही हफ्तों में भारत तक पहुंचाया जा सकता है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब मिडिल ईस्ट से तेल आने में दिक्कत हो रही है। भारत पहले अपनी कुल जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से मंगाता था। ऐसे में रूसी तेल की उपलब्धता भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर तेल की आपूर्ति में रुकावट बढ़ती है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए यह तेल काफी मददगार साबित हो सकता है। हालांकि सूत्रों ने यह साफ नहीं किया है कि जहाजों में मौजूद यह तेल मूल रूप से किस देश के लिए भेजा जा रहा था। लेकिन इतना जरूर बताया गया है कि जो जहाज रूसी नहीं हैं और तेल लेकर चल रहे हैं, उन्हें जरूरत पड़ने पर जल्दी भारत की तरफ मोड़ा जा सकता है।
बता दें कि, भारत की तेल रिफाइनरियां हर दिन करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं। ऐसे में अगर समुद्री शिपिंग मार्गों में लंबे समय तक कोई रुकावट आती है तो देश में तेल की आपूर्ति जल्दी कम हो सकती है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अगर मध्य पूर्व के देशों से कच्चे तेल की सप्लाई घटती है तो रूस इस कमी को पूरा करने में भारत की मदद कर सकता है। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में मॉस्को भारत की कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 40 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकता है।
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