BJP विधायक का तीखा वार, “बेनीवाल सस्ती लोकप्रियता के भूखे हैं”

BJP विधायक का तीखा वार, “बेनीवाल सस्ती लोकप्रियता के भूखे हैं”

राजस्थान की राजनीति में नागौर एक बार फिर से चर्चा में है। नागौर जिले की खींवसर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा ने नागौर लोकसभा सीट से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संस्थापक हनुमान बेनीवाल पर तीखा हमला बोला है। डांगा ने बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों को “निम्न स्तर की बयानबाजी” बताते हुए कड़ी निंदा की।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब हनुमान बेनीवाल ने जयपुर के शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ रोजाना बयानबाजी शुरू की। बेनीवाल का कहना है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर विफल हो रही है, लेकिन उनके बयानों की भाषा और शैली पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई है।

रेवंतराम डांगा ने इस संदर्भ में कहा—
“एक चुने हुए जनप्रतिनिधि से मर्यादित भाषा और व्यवहार की अपेक्षा होती है, लेकिन हनुमान बेनीवाल अपनी हार के बाद से तिलमिलाए हुए हैं और अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।”

डांगा ने बेनीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि वो कांग्रेस की बैसाखियों पर सवार होकर दिल्ली पहुंचे हैं और अब जयपुर के पवित्र शहीद स्मारक को राजनीतिक मंच बना रहे हैं।

“माननीय मुख्यमंत्री के खिलाफ जिस तरह की अशोभनीय और तुच्छ भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह अत्यंत निंदनीय है। यह सब सस्ती लोकप्रियता बटोरने का प्रयास है, जिसे जनता अब भली-भांति समझ चुकी है।”
डांगा ने बेनीवाल पर सरकारी आवास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक लोकसेवक के लिए दिया गया सरकारी आवास एक अस्थायी सुविधा होती है, न कि स्थायी अधिकार।

“जब नियमों के तहत नोटिस मिलता है, तो उसे राजनीतिक द्वेष बताना और नैतिकता का दिखावा करना बेनीवाल की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तंत्र को बदनाम करने और संवैधानिक पदों का अपमान करने की यह आदत लोकतंत्र के लिए घातक है।

“जो लोग खुद को जनता का मसीहा बताते हैं, वे खुद नियम-कानूनों की अनदेखी कर रहे हैं।”
रेवंतराम डांगा ने कहा कि जनता अब नेताओं के बोल और उनके व्यवहार में फर्क करना जानती है।

“स्वच्छ लोकतंत्र की नींव मर्यादा, शालीनता और संवैधानिक आचरण पर टिकी होती है। लेकिन जब कोई नेता अपने अहंकार और हताशा में मर्यादा को लांघता है, तो जनता उसे जल्दी ही आइना दिखा देती है।”
हनुमान बेनीवाल बनाम भाजपा की लड़ाई अब सिर्फ राजनीतिक विचारधारा की नहीं, बल्कि भाषा और व्यवहार की लड़ाई बन गई है। जहां एक ओर बेनीवाल सरकार पर हमलावर हैं, वहीं भाजपा नेता अब उनके व्यक्तिगत आचरण और भाषा शैली को लेकर खुलकर मैदान में उतर आए हैं।

नागौर की जनता इस लड़ाई को ध्यान से देख रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि जनता किसकी बात को असल समझती है — जनहित की चिंता या सस्ती लोकप्रियता की बयानबाजी। फिलहाल, राजस्थान की सियासत में यह एक और बड़ी बहस बन गई है।

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