उत्तराखण्ड

रुद्रपुर: कांग्रेस की संगठन सृजन बैठक बनी अखाड़ा, पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच आपस में चले लात-घूसे, वरिष्ठ अधिकारियों के फटे कपड़े, मची अफरा-तफरी

रुद्रपुर: कांग्रेस की संगठन सृजन बैठक बनी अखाड़ा

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत आयोजित बैठक उस समय हंगामे में तब्दील हो गई जब पार्टी कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। जिला मुख्यालय रुद्रपुर स्थित सिटी क्लब में चल रही इस बैठक में अचानक लात-घूंसे चलने लगे और देखते ही देखते पूरा माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। बैठक का उद्देश्य जहां पार्टी के नगर इकाई के गठन को लेकर कार्यकर्ताओं से सुझाव लेना था, वहीं ये बैठक कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आपसी खींचतान और गुटबाजी का अखाड़ा बन गई।

सिटी क्लब में आयोजित इस बैठक में प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक डॉक्टर नरेश कुमार, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता संजय जुनेजा और कई अन्य नेता मौजूद थे। बैठक में जिले भर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया था, ताकि नगर अध्यक्ष पद को लेकर कार्यकर्ताओं से राय ली जा सके और संगठन को मजबूत किया जा सके।

बैठक सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और शुरुआत में सभी कुछ सामान्य नजर आ रहा था। पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं से राय ले रहे थे और हर एक से उनकी बात सुनी जा रही थी। लेकिन तभी अचानक दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला गाली-गलौच और हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने वरिष्ठ कार्यकर्ता नरेंद्र मिश्रा को घेर लिया, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई।

हंगामे की सूचना मिलते ही सिटी क्लब में उपस्थित पर्यवेक्षकों और नेताओं ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ता किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। मारपीट की यह घटना न केवल बैठक के माहौल को बिगाड़ गई, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता संजय जुनेजा ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस उद्देश्य के साथ यह बैठक आयोजित की गई थी, उसे कुछ असामाजिक तत्वों ने बिगाड़ दिया। यह संगठन की बैठक थी, न कि किसी गुंडों की पंचायत। कुछ लोग जबरन अंदर घुस आए और माहौल को खराब कर दिया।”

उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में पहले भी हल्की-फुल्की कहासुनी हो रही थी, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह बहस इस हद तक पहुंच जाएगी। संजय जुनेजा ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, पर्यवेक्षक हरेंद्र बोरा ने भी इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर कार्यकर्ताओं से संवाद किया जा रहा था, ताकि संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जा सके। लेकिन बैठक के ठीक बाद दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया, जिससे बैठक का माहौल बिगड़ गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हंगामा करने वाले कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. नरेश कुमार ने भी बैठक के दौरान उत्पन्न हुए हालात पर चिंता जताई और कहा कि कांग्रेस जैसी पुरानी और अनुशासित पार्टी में इस तरह की घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि संगठन सृजन अभियान का उद्देश्य बेहतर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को बदलना है, लेकिन जिस तरह का व्यवहार कुछ लोगों ने किया, वह पूरी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।

कांग्रेस संगठन में बीते कुछ समय से लगातार बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उन्हें संगठनात्मक पदों की जिम्मेदारी देने की योजना पर काम किया जा रहा है। लेकिन इस तरह की घटनाएं पार्टी के आंतरिक अनुशासन और गुटबाजी की गंभीर समस्या को उजागर करती हैं।

बैठक में हुए हंगामे के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा का माहौल बना रहा। कुछ नेताओं ने इस घटना को रुद्रपुर कांग्रेस की गुटबाजी का नतीजा बताया तो कुछ ने इसे बाहरी लोगों की साजिश बताया। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या कदम उठाता है और दोषियों पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर साबित कर दिया है कि संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस को केवल चेहरों की नहीं, बल्कि व्यवहार और अनुशासन की भी समीक्षा करनी होगी।

Kirti Bhardwaj

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