भक्ति

क्या है अघोरी और नागा साधुओं की वास्तविकता

अघोरी और नागा साधुओं का सच

144 वर्षों बाद आए इस महाकुंभ में हमें साधु-संतों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। जो कि देखने में वाकई ऊर्जा से भरपूर, शक्तियों का पुंज नजर आता है।
कई संतों ने कठिन तपस्या कर ऐसा मुकाम हासिल किया है कि वो प्रभू भक्ति में बिल्कुल लीन हो चुके हैं
नाम जप के अलावा उनके जहन में कुछ भी नहीं होता।
वहीं कुछ ऐसे साधु-संत भी हैं, जो अभी अपने अंदर की आत्मा को पहचान कर उसको परमात्मा से मिलवाने की कोशिश में जुट चुके हैं।
लेकिन क्या आपको पता है कि, सभी साधु-संतों को किसी एक कैटेगिरी में नहीं डाला जा सकता। क्योंकि सभी अपने कर्म, तप, और शक्तियों से भिन्न-भिन्न होते हैं।
अघोरी हिंदू धर्म के साधु होते हैं, जो शिव के भक्त होते हैं, और तपस्या, साधना और आध्यात्मिक जागृति के लिए जाने जाते हैं। वे भगवान शिव के रौद्र और भयानक रूप “काल भैरव” की पूजा करते हैं। अघोरी समाज से अलग-थलग रहते हैं और उन चीज़ों का पालन करते हैं जिन्हें आम समाज अपवित्र मानता है, जैसे शमशान में साधना करना, मानव खोपड़ी (कपाल) का उपयोग करना, और मांसाहार करना

अघोरियों की विशेषताएं:

1.आसन और स्थान: अघोरी श्मशान घाटों में साधना करते हैं। वे मानते हैं कि श्मशान सबसे पवित्र स्थान है, जहां जीवन और मृत्यु का मिलन होता है।
2.भोजन: वे किसी भी प्रकार का भोजन ग्रहण कर सकते हैं, चाहे वह मांस, शराब या कोई और वस्तु हो।
3.वेशभूषा: अघोरी सामान्यतः नग्न रहते हैं या कम कपड़े पहनते हैं। वे अपने शरीर पर राख (श्मशान की चिता की राख) लगाते हैं।
4.मान्यता: उनका मानना है कि संसार में कुछ भी अशुद्ध नहीं है। सब कुछ शिव का ही रूप है।
5.साधना: उनकी साधना तंत्र और मंत्र पर आधारित होती है, और वे मोक्ष प्राप्त करने के लिए आत्मा की उच्चतम स्थिति तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।

नागा साधु कौन होते हैं?

नागा साधु भी हिंदू धर्म के साधु होते हैं जो विशेष रूप से भगवान शिव और विष्णु के भक्त होते हैं। वे मुख्यतः सनातन धर्म की परंपराओं और अखाड़ों से जुड़े होते हैं। नागा साधु समाज से दूरी बनाकर कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

नागा साधुओं की विशेषताएं:

1.दीक्षा और अखाड़े: नागा साधु बनने के लिए व्यक्ति को एक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। दीक्षा लेने के बाद वे अपने सांसारिक जीवन को पूरी तरह त्याग देते हैं।
2.वेशभूषा: वे अधिकतर नग्न रहते हैं, अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं, और केवल एक लंगोट या गेरुआ वस्त्र पहनते हैं।
3.हथियार: नागा साधु अक्सर त्रिशूल, तलवार, या भाले जैसे हथियार धारण करते हैं।
4.कुंभ मेले में भागीदारी: नागा साधु विशेष रूप से कुंभ मेले में दिखते हैं, जहां वे पहले स्नान करने का अधिकार रखते हैं।
5.आश्रम जीवन: नागा साधु अलग-अलग अखाड़ों से जुड़े होते हैं, जैसे जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा आदि।

अघोरी और नागा साधु में अंतर:

1.उद्देश्य:
•अघोरी मुख्य रूप से मोक्ष प्राप्त करने और आत्मज्ञान के लिए कठोर तंत्र साधना करते हैं।
•नागा साधु धर्म की रक्षा और सनातन परंपराओं को बनाए रखने के लिए तपस्या करते हैं।
2.साधना का तरीका:
•अघोरी तंत्र मार्ग का अनुसरण करते हैं, जो श्मशान, काली साधना, और भूत-प्रेत से जुड़ी साधनाओं पर आधारित है।
•नागा साधु योग, ब्रह्मचर्य, और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं।
3.भोजन और आचरण:
•अघोरी किसी भी प्रकार का भोजन, चाहे वह मांस या मादक पदार्थ हो, ग्रहण कर सकते हैं।
•नागा साधु मुख्य रूप से सात्विक भोजन करते हैं और साधारण जीवन जीते हैं।
4.समाज से संबंध:
•अघोरी समाज से पूरी तरह कटे रहते हैं और अकेले साधना करते हैं।
•नागा साधु अखाड़ों में रहते हैं और समाज के साथ संपर्क बनाए रखते हैं।
5.भौतिक स्वरूप:
•अघोरी अक्सर खोपड़ी, हड्डियों और चिता की राख का उपयोग करते हैं।
•नागा साधु अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं और हथियार धारण करते हैं।
अघोरी और नागा साधु दोनों ही साधु समुदाय के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन उनकी साधना और जीवन शैली में काफी अंतर होता है। अघोरी का जीवन तंत्र और शिव के रौद्र रूप की पूजा पर आधारित है, जबकि नागा साधु धर्म की रक्षा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए योग और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। दोनों का मुख्य उद्देश्य आत्मा की उच्चतम स्थिति तक पहुंचकर मोक्ष प्राप्त करना है।
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