कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेता शशि थरूर को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है। पिछले कई महीनों से यह चर्चा लगातार बनी हुई थी कि शशि थरूर और पार्टी आलाकमान के बीच संबंध सहज नहीं हैं। इसी कारण थरूर पार्टी के कई कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए दिखाई दिए थे। हालांकि कांग्रेस की ओर से समय-समय पर यह संदेश देने की कोशिश की जाती रही कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन केरल के कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की महापंचायत के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोच्चि में हुई इस महापंचायत को केरल कांग्रेस के लिए एक अहम राजनीतिक आयोजन माना जा रहा था। मंच पर पार्टी के कई बड़े नेताओं को जगह दी गई थी और कार्यक्रम में राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी भी रही। इस दौरान कांग्रेस आलाकमान के नेता मंच पर बैठे लगभग सभी नेताओं से बातचीत करते नजर आए। लेकिन कार्यक्रम के दौरान यह साफ तौर पर देखा गया कि शशि थरूर से किसी भी वरिष्ठ नेता की खास बातचीत नहीं हुई। यही नहीं, माहौल से यह भी संकेत मिला कि थरूर खुद को इस कार्यक्रम में सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे।
विवाद उस समय और गहरा हो गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंच से अपने संबोधन के दौरान वहां मौजूद लगभग सभी बड़े नेताओं का नाम लिया, लेकिन शशि थरूर का नाम नहीं लिया गया। शशि थरूर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं और तिरुवनंतपुरम से सांसद भी हैं। ऐसे में मंच से उनका नाम न लिया जाना राजनीतिक गलियारों में अपमान के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर इसे एक सीनियर नेता की अनदेखी माना गया, जिसने पहले से मौजूद असहजता को और बढ़ा दिया।
राहुल गांधी के संबोधन के बाद शशि थरूर का व्यवहार भी चर्चा का विषय बन गया। बताया जा रहा है कि इसके बाद वे कार्यक्रम में खुद को असहज महसूस कर रहे थे। इसी बीच उन्होंने बीच में ही कार्यक्रम छोड़ दिया और बाहर निकल आए। उनका इस तरह कार्यक्रम से बाहर जाना नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि मंच पर उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला, जिससे उनकी असहजता और बढ़ गई।
शशि थरूर केरल की राजनीति में एक बड़ा नाम माने जाते हैं। उनकी पहचान न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी रही है। ऐसे में पार्टी के एक बड़े आयोजन में इस तरह की स्थिति पैदा होना केरल कांग्रेस यूनिट के भीतर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, थरूर ने यह भी तय किया है कि वे विधानसभा चुनाव से जुड़े केरल के नेताओं के साथ हाईकमान की होने वाली बातचीत में हिस्सा नहीं लेंगे। इस फैसले को भी पार्टी से उनकी बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व पिछले कुछ समय से यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि उनके बीच सब कुछ ठीक है। थरूर भी सार्वजनिक तौर पर पार्टी लाइन से अलग कोई तीखा बयान देने से बचते नजर आए थे। वहीं कांग्रेस नेतृत्व की ओर से भी यह संदेश देने की कोशिश होती रही कि थरूर पार्टी का अहम हिस्सा हैं। लेकिन कोच्चि की महापंचायत में जो कुछ हुआ, उसने इस पूरी कवायद पर पानी फेर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद केरल कांग्रेस यूनिट में शशि थरूर की भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी लाइन से अलग रहे उनके कुछ पुराने बयानों को लेकर जो अंदरूनी असहजता पहले से मौजूद थी, वह भी अब खुलकर सामने आने लगी है। कई नेताओं का मानना है कि यह तनाव अब केवल अंदरखाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में भी दिखने लगा है।
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम पहले से तय था। इसी क्रम में शशि थरूर ने यह भी पूछा था कि उन्हें राहुल गांधी के साथ प्रख्यात लेखिका एम. लीलावती के घर जाना चाहिए या सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना चाहिए। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे सीधे कार्यक्रम स्थल पर रिपोर्ट करें और राहुल गांधी के आने से पहले अपनी स्पीच दें। इसके बाद कार्यक्रम में राहुल गांधी की मौजूदगी में छह अन्य नेताओं ने अपने विचार रखे।
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