विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में गरमाई सियासत
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक गर्मी काफी बढ़ चुकी है। बीते कुछ हफ़्तों से भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। अब इस बहस में बड़ा और निर्णायक बयान आया है शिरोमणि अकाली दल नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल की तरफ़ से।
उन्होंने साफ़ किया कि, बीजेपी–अकाली दल के बीच गठबंधन तभी संभव है, जब पंजाब के असली मुद्दों का समाधान किया जाए।
दरअसल, बीजेपी नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि, 2032 तक अकाली दल और बीजेपी के बीच गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। इस बयान ने पंजाब की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी थी।
अब हरसिमरत कौर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, कैप्टन की बातों में दम है, लेकिन तस्वीर इतनी सीधी भी नहीं है। उन्होंने साफ़ कहा कि, गठबंधन का रास्ता तभी खुलेगा, जब केंद्र सरकार पंजाब को समझने की कोशिश करे और पंजाबियों की चिंताओं का समाधान हो।
हरसिमरत कौर ने याद दिलाया कि, उन्होंने केंद्र में मंत्री पद से इस्तीफ़ा केवल किसानों के हितों के लिए दिया था। उनके अनुसार, ये कोई छोटा कदम नहीं था। उन्होंने कहा, “लोग सरपंची तक नहीं छोड़ते, लेकिन मैंने चार साल का कार्यकाल होने के बावजूद पद छोड़ दिया। हमारी पार्टी ने हमेशा पंजाब के हित को पहले रखा है और आगे भी यही करेगी।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, शिरोमणि अकाली दल ने कभी भी पंजाब के अधिकारों के साथ समझौता नहीं किया और न आगे करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि, “हम सत्ता के लिए अपने सिद्धांत नहीं छोड़ते। हमारी राजनीति पंजाब, पंजाबियत और पंजाबियों के लिए है”।
हरसिमरत कौर ने अपने बयान में कैप्टन अमरिंदर सिंह और बीजेपी नेता सुनील जाखड़ का जिक्र करते हुए कहा कि, पंजाब की जमीनी राजनीति को ये नेता अच्छी तरह जानते हैं। उनके अनुसार, बीजेपी पंजाब में अकेले चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है, और ऑथेंटिक पंजाबी वोट-बैंक पाने के लिए उसे शिरोमणि अकाली दल की आवश्यकता रहती है।
उन्होंने कहा, “दिल्ली में बैठे सलाहकार बीजेपी को गलत सलाह देते हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यही है कि, पंजाब में बीजेपी बिना शिरोमणि अकाली दल के आगे नहीं बढ़ सकती।”
हरसिमरत कौर ने ये भी दावा किया कि, अगर भविष्य में बीजेपी–शिअद में गठबंधन बनता है, बीजेपी में वे लोग परेशान होंगे जो इस समय निजी स्वार्थ की वजह से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि, “अगर शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन हुआ तो कुछ लोगों की राजनीतिक दुकानें बंद हो जाएंगी। इसलिए वे गलत सलाह देकर गठबंधन बनने से रोकना चाहते हैं।”
कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान कि, 2032 तक गठबंधन नहीं होगा—पर हरसिमरत कौर ने कहा कि, उनकी बात फिलहाल सही लगती है, क्योंकि पंजाब के मुद्दों पर केंद्र सरकार ने अभी तक वो संजीदगी नहीं दिखाई, जिसकी पंजाब को अपेक्षा है।
लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि, “अगर पंजाब के मुद्दों को समझा गया, उन्हें सुलझाया गया, तो गठबंधन का रास्ता खुल सकता है।” यानी भविष्य को लेकर दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन फिलहाल रिश्ता “शर्तों के सहारे” ही आगे बढ़ेगा।
पंजाब की राजनीति बहुत संवेदनशील और तेज़ी से बदलती है। किसान आंदोलन के बाद शिरोमणि अकाली दल–बीजेपी संबंधों की दूरी बढ़ी, और पंजाब में बीजेपी का राजनीतिक ग्राफ भी अस्थिर रहा। ऐसे में 2027 चुनाव से पहले कोई बड़ा गठबंधन बनेगा या नहीं, ये कई फैक्टरों पर निर्भर करेगा जिनमें किसानों का रुख, धार्मिक-राजनीतिक संतुलन, पंजाब की आर्थिक मांगें, केंद्र–राज्य की राजनीतिक समझ शामिल है।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक का माना हैं कि, पंजाब में गठबंधन की राजनीति हमेशा समीकरण बिगाड़ती भी है और बनाती भी। इसलिए ये कहना कठिन है कि, 2027 से पहले कौन सा मोड़ अचानक राजनीति का रंग बदल दे।
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