PANCHAYAT CHUNAV: उत्तराखंड में जल्द होने जा रहे हैं पंचायत चुनाव
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों की पिच पर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे से भिड़ने को तैयार हैं। मिशन 2027 के लिए प्रैक्टिस मैच के रूप में देखे जा रहे पंचायत चुनाव से ये तय होगा कि 47.32 लाख से अधिक ग्रामीण मतदाताओं का रुख किस दल की ओर है।
नगर निकाय चुनाव में बड़ी बढ़त से उत्साहित BJP की इस चुनाव में रणनीति प्रत्येक ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत में अपने अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की है। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ग्रामीण मतदाताओं में अपनी पैठ बढ़ाने के बड़े अवसर के रूप में इस चुनाव को ले रही है, ताकि गांवों में बूथों तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क मजबूत किया जा सके।
प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के आसार अब बहुत कम हैं। चुनाव के लिए जिलों में पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। इसके बाद से राजनीतिक दलों में भी हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ये अंतिम बड़ा चुनाव होगा।
पंचायत चुनाव की महत्वपूर्ण भूमिका का अंदाजा इससे लग सकता है कि इसमें भाग लेने वाले मतदाताओं की संख्या प्रदेश के नगर निकायों यानी शहरी मतदाताओं से अधिक है। प्रदेश में शहरी मतदाताओं की संख्या 30.63 लाख से अधिक है, जबकि पंचायत चुनाव में 47.32 लाख से अधिक मतदाता हैं। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों दल पंचायत चुनाव में निर्णायक बढ़त चाहते हैं। इसे देखकर ही दलीय रणनीति तय की जा रही हैं।
भाजपा इस चुनाव के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने प्रतिनिधियों को चुनाव मैदान में उतारेगी। ऐसे में ये प्रतिनिधि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी नहीं होंगे, लेकिन पार्टी से जुड़े हुए होंगे। ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायतों में समर्थित प्रत्याशी के स्थान पर इस बार ये बदलाव करने का फैसला लिया गया है। जिला पंचायत में सत्ताधारी दल अधिकृत प्रत्याशी खड़ा करेगी। इसके साथ ही इन चुनाव में भाजपा पंचायत स्तरीय बैठकों का क्रम शीघ्र प्रारंभ करने जा रही है।
वही उत्तराखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि,
“भाजपा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रत्येक ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत में इस बार पार्टी प्रतिनिधियों को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। इससे गांवों में संगठन को मजबूती मिलेगी”
वहीं, कांग्रेस को नगर निकाय चुनाव में निर्णायक बढ़त भले ही नहीं मिली, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के निकटस्थ नगर निकायों में पार्टी का प्रदर्शन सुधरा है। पार्टी इसे बदलाव का संकेत मानकर ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं पर पकड़ मजबूत करने के लिए सर्वोदय संकल्प शिविरों का सहारा लेने जा रही है। साथ ही जिलों में आरक्षण का निर्धारण किस प्रकार होता है, इस पर बारीक नजर रखी जा रही है। जिलों में नियुक्त प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा कर त्रिस्तरीय पंचायतों में बेहतर प्रदर्शन कैसे करें, इसे लेकर रिपोर्ट सौंपेंगे।
वही उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी से करन माहरा ने कहा कि
“कांग्रेस चुनाव की तैयारी पहले से कर रही है। जिलों में आरक्षण का निर्धारण होना है। आरक्षण निर्धारण में नियमों का उल्लंघन करने का प्रयास न हो, कांग्रेस इसे लेकर सतर्कता बरतेगी”
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