Nitish Kumar behaviour sparks another political row: नीतीश कुमार के व्यवहार पर फिर सियासी घमासान
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं. पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय संवाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपते समय मुख्यमंत्री ने एक महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटा दिया. यह घटना उस समय हुई जब एक हजार से अधिक डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे थे. कार्यक्रम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया.
विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर कड़ी आपत्ति जताई. राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस सहित कई दलों ने वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री के व्यवहार को असंवेदनशील बताया. विपक्ष का आरोप है कि यह घटना मुख्यमंत्री की अस्थिर मानसिक स्थिति का उदाहरण है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार न केवल महिला की निजता का उल्लंघन है, बल्कि समाज को गलत संदेश भी देता है.
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिलाओं के साथ अपने व्यवहार को लेकर विवादों में घिरे हों. हाल के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी. मुजफ्फरपुर में एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा की महिला प्रत्याशी रमा निषाद को माला पहनाई. भारतीय समाज में महिलाओं को पुरुषों द्वारा माला पहनाने की परंपरा नहीं मानी जाती. जब इस दौरान मंच पर मौजूद राज्यसभा सांसद संजय झा ने मुख्यमंत्री का हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश की, तो नीतीश कुमार ने उन्हें हल्की फटकार भी लगाई. इस घटना को लेकर भी काफी विवाद हुआ था.
इससे कुछ समय पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सहकारिता विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक महिला पुरस्कार विजेता को सम्मानित करते हुए उनका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया था. इसके बाद उन्होंने महिला के कंधे पर भी हाथ रखा. इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं.
चुनाव प्रचार के दौरान ही बेगूसराय में जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के एक बयान ने भी विवाद खड़ा कर दिया था. उन्होंने कहा था, “पहले लड़कियां कपड़े पहनती थीं? अब देखिए कितना बढ़िया हो गया है.” इस बयान को लेकर भी महिलाओं और विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई थी.
महिलाओं को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयानों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. नवंबर 2023 में विधानसभा के भीतर आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर ऐसा बयान दिया था, जिस पर सदन के भीतर और बाहर हंगामा मच गया था. उन्होंने कहा था कि अगर लड़की पढ़-लिख जाएगी तो बच्चों की संख्या घटेगी, क्योंकि पुरुष जो रोज रात में करता है, उसी से बच्चे पैदा होते हैं. इस बयान के बाद विपक्ष ने तीखी आलोचना की थी और बाद में मुख्यमंत्री को माफी मांगनी पड़ी थी.
इसी तरह जनवरी 2023 में महिलाओं के एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे कहते सुने गए थे, “मर्द लोग तो रोज-रोज करते ही रहता है.” इस टिप्पणी को भी महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बताया गया था.
इन तमाम विवादों के बावजूद यह भी सच है कि नीतीश कुमार को लंबे समय तक सत्ता में बनाए रखने में महिला मतदाताओं का भरोसा अहम भूमिका निभाता रहा है. लालू प्रसाद यादव के शासनकाल के बाद सत्ता में आए नीतीश कुमार ने जातीय समीकरणों से इतर महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की. कानून व्यवस्था में सुधार और लड़कियों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए साइकिल योजना की शुरुआत ने उनकी छवि को मजबूत किया. इस योजना के बाद स्कूलों में छात्राओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई.
नीतीश कुमार के कार्यकाल में महिलाओं के लिए जीविका स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया. इन समूहों के जरिए 1.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया गया. हाल के चुनाव से पहले एक करोड़ से अधिक महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई, जिसे महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर देखा गया.
साल 2016 में मुख्यमंत्री ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया. इस निर्णय को महिलाओं के हित में एक बड़ा कदम माना गया, क्योंकि शराबबंदी को घरेलू हिंसा और पारिवारिक समस्याओं से जोड़कर देखा जाता रहा है. शराबबंदी के फैसले ने भी महिलाओं के बीच नीतीश कुमार के समर्थन को मजबूत किया.
एक ओर महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं और फैसलों के चलते नीतीश कुमार को महिला सशक्तिकरण का समर्थक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके बयान और व्यवहार बार-बार विवादों को जन्म देते रहे हैं. ताजा घटना ने एक बार फिर मुख्यमंत्री के सार्वजनिक आचरण और महिलाओं के सम्मान को लेकर बहस को तेज कर दिया है.
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