उत्तराखंड में नजर आ रहा है कुदरत का कहर
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में एक बार फिर कुदरत ने कहर बरपाया है। चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के बाद आए इस कहर से कई परिवारों के मकान मलबे में दब गए हैं, सड़कों पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है और नदी-नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।
चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में बादल फटने की वजह से भारी मात्रा में मलबा आया है। इस आपदा में कई घर दब गए हैं और कई लोगों के लापता होने की खबर है। चमोली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है। इनमें नंदप्रयाग, कमेड़ा, भनेरपानी, पागलनाला और जिलासू के पास की सड़कें प्रमुख रूप से बाधित हैं।
सड़कों के अवरुद्ध होने से राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही में भी कठिनाई आ रही है, लेकिन प्रशासन वैकल्पिक मार्गों की पहचान कर राहत कार्य पहुंचाने में जुटा है। देवाल क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है।
इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले के तहसील बसुकेदार अंतर्गत बड़ेथ डुंगर तोक क्षेत्र में भी बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी है। भारी मलबा आने से कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। जिलाधिकारी प्रतीक जैन आपदा कंट्रोल रूम से लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों से सीधा संपर्क बनाए रखे हुए हैं।
रुद्रप्रयाग जिले के स्यूर गांव में एक मकान के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और एक बोलेरो वाहन के बह जाने की पुष्टि हुई है। बड़ेथ, बगडधार और तालजामनी गांव के दोनों ओर गदेरे (स्थानीय जलधारा) में पानी और मलबा आने से स्थिति और भयावह हो गई है। किमाणा गांव में तो खेतों की जमीन पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गया है, जिससे खेती को भारी नुकसान हुआ है।
अरखुण्ड क्षेत्र में मछली तालाब और मुर्गी फार्म बह गए हैं। इसके अलावा छेनागाड़ बाजार क्षेत्र में भी मलबा आने से वाहन बह गए हैं। छेनागाड़ के डुंगर और बड़ेथ गांव से कुछ लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है, जिसकी पुष्टि के लिए राहत टीमें अभियान चला रही हैं।
रुद्रप्रयाग पुलिस ने भी एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सिरोबगड़ से लगभग 800 मीटर आगे श्रीनगर की ओर, गोवा ब्रिज नामक स्थान पर, अलकनंदा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि उसका पानी राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
प्रशासन द्वारा NH, PWD और PMGSY की टीमें तैनात कर दी गई हैं जो अवरुद्ध मार्गों को खोलने का प्रयास कर रही हैं। राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक रास्तों की पहचान की जा रही है। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनें लगाकर मलबा हटाने का कार्य चल रहा है।
प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। अस्थाई शिविरों की व्यवस्था की जा रही है, जहां उन्हें भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान इस तरह की आपदाएं आम होती जा रही हैं, जिससे न सिर्फ जान-माल का नुकसान हो रहा है बल्कि पहाड़ी जीवनशैली भी संकट में पड़ गई है। सरकार और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हैं, लेकिन दुर्गम भूगोल और लगातार बारिश से राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग भी सतर्क है और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में राहत कार्यों की निगरानी कर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्तराखंड के इन क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और आपदा की घटनाएं एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की मार कितनी खतरनाक हो सकती है।
आने वाले दिनों में मौसम के अनुमान को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर रखा है और लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और अनावश्यक यात्रा न करें।
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