भारत में तैयार किए गए नैनो उर्वरक अब दुनिया के दूसरे देशों में भी तेजी से पहचान बना रहे हैं। इफको का नैनो डीएपी अब रिपब्लिक ऑफ कोलंबिया में सफलतापूर्वक पंजीकृत हो गया है। इसे भारतीय कृषि और सहकारी क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस सफलता से भारत की नई कृषि तकनीक को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिली है और किसानों के लिए आधुनिक खेती के नए रास्ते खुले हैं।
इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी के मुताबिक ये उपलब्धि केवल इफको की नहीं, बल्कि भारत के किसानों, वैज्ञानिकों और सहकारी मॉडल की सफलता है। आधुनिक तकनीक और किसान हित को ध्यान में रखते हुए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिससे खेती को आसान और कम खर्च वाला बनाया जा सके।
दिलीप संघाणी के मुताबिक, कोलंबिया में पहले नैनो उर्वरकों के लिए कोई तय नियम या प्रोटोकॉल मौजूद नहीं था। ऐसे में वहां नैनो डीएपी को मंजूरी दिलाना आसान नहीं था। लगभग डेढ़ साल तक लगातार बातचीत, परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वहां नैनो उर्वरकों के लिए नए नियम तैयार किए गए। जिसके बाद ही इफको के नैनो डीएपी को पंजीकरण मिल पाया, जिसे भारत की कृषि तकनीक की बड़ी जीत माना जा रहा है। इससे ये साबित होता है कि, भारतीय तकनीक अब दूसरे देशों का भरोसा भी जीत रही है और आने वाले समय में दूसरे देशों में भी भारतीय नैनो उर्वरकों की मांग बढ़ सकती है. इससे भारतीय कृषि क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
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