हरियाणा

हरियाणा चुनाव: कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

हरियाणा में आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी है। 49 दिन में 160 से अधिक रैलियों का आयोजन करते हुए, कांग्रेस ने चुनावों के पूर्व और बाद में भाजपा सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को उठाया। बेरोजगारी और युवाओं के विदेश पलायन जैसे मुद्दे सबसे बड़े थे, जिन पर राहुल गांधी ने जोर देकर बात की।

चुनावी रणनीति और रैलियाँ

कांग्रेस ने प्रचार के आरंभिक दौर में थोड़ी पिछड़ने के बाद, अंतिम चरण में पूरी ताकत झोंकी। पार्टी के शीर्ष नेताओं और स्थानीय नेताओं ने मिलकर व्यापक स्तर पर रैलियाँ और जनसभाएँ आयोजित कीं। चुनावी रणनीति के तहत, कांग्रेस ने टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक में भाजपा को खुला अवसर दिया, और फिर अपने फैसले के अनुसार रणनीति में बदलाव किया।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंतिम दिनों में हरियाणा में कई रैलियाँ कीं। राहुल ने 8 रैलियाँ और रोड शो किए, जबकि प्रियंका ने 4 रैलियाँ कीं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने भी राज्यभर में अपने अभियान चलाए।

मुद्दों पर फोकस

कांग्रेस ने किसानों, जवानों और पहलवानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। ओपीएस, बढ़ते अपराध, और महंगाई पर भी पार्टी ने जोर दिया। जातिवाद और दलितों के मुद्दों पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा, लेकिन कांग्रेस ने संविधान बचाने और आरक्षण के मुद्दे को फिर से उभारा।

कांग्रेस की किलेबंदी

कांग्रेस हाईकमान ने अपने गढ़ में मजबूत किलेबंदी की कोशिश की। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस का ध्यान रोड शो पर केंद्रित रहा। राहुल गांधी ने तीन दिन हरियाणा में प्रचार किया, जिसमें उन्होंने नारायणगढ़ से अपनी यात्रा की शुरुआत की।

प्रियंका गांधी ने भी जुलाना और बवानीखेड़ा में अपने चहेते प्रत्याशियों के समर्थन में रैलियाँ कीं। पार्टी ने जीटी बेल्ट और जाट लैंड के साथ भाजपा के गढ़ अहीरवाल में सेंध लगाने की कोशिश की।

पड़ोसी राज्यों के नेताओं की भागीदारी

हरियाणा चुनाव में पड़ोसी राज्यों के कई दिग्गज नेताओं ने भी भाग लिया। इनमें हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुख्खू, पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, और पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी शामिल थे।

एकजुटता का संदेश

कांग्रेस ने खेमों में बंटी होने के बावजूद एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। राहुल गांधी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा के बीच सामंजस्य स्थापित किया। हालांकि, सैलजा को टिकट न मिलने के कारण कुछ नाराजगी भी देखने को मिली।

बागियों की समस्या

कांग्रेस से 24 नेताओं ने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसके कारण उन्हें अनुशासनहीनता के चलते पार्टी से निकाल दिया गया। हालांकि, कुछ नेताओं को पार्टी में वापस लाने की कोशिशें भी की जा रही हैं।

कुमारी सैलजा की सक्रियता

कुमारी सैलजा ने भी दर्जनभर जनसभाएं कीं, लेकिन मुख्य रूप से अपने समर्थकों के लिए प्रचार किया।

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