हरियाणा में चुनाव प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और अब एक दिन का इंतजार है नतीजों का। इस बार हरियाणा में 67.90 फीसदी मतदान हुआ है, जो दर्शाता है कि मतदाता काफी उत्साहित थे। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल है: नई सरकार कौन बनाएगा? इस लेख में हम हरियाणा के चुनावी परिदृश्य, प्रमुख दलों की स्थिति और संभावित परिणामों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर मतदान समाप्त हो चुका है। अधिकांश एग्जिट पोल ने कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान लगाया है। पिछले दस वर्षों में भाजपा की सत्ता से वापसी के संकेत कांग्रेस के लिए उत्साहवर्धक हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए खींचतान भी देखने को मिल रही है।
कांग्रेस ने चुनावी रणनीति के तहत जाट, दलित, मुस्लिम और सिख समुदायों का समर्थन जुटाने की कोशिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जाटों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए मेहनत की है। इसके अलावा, दलित नेता अशोक तंवर को कांग्रेस में शामिल करके भाजपा की रणनीतियों को चुनौती देने का प्रयास किया गया है।
एग्जिट पोल के अनुसार, जाटों और दलितों का लामबंद होना कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही ओबीसी और सामान्य वर्ग का कुछ वोट भी कांग्रेस को मिल सकता है। चुनाव से पहले कांग्रेस ने 36 बिरादरी की एकजुटता की बात की थी, जो उन्हें मददगार साबित हो सकती है।
भाजपा एग्जिट पोल को नजरअंदाज करते हुए अपने कैडर वोट और ओबीसी, सामान्य वर्ग तथा सरकारी लाभार्थी वोट बैंक पर भरोसा कर रही है। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार के खिलाफ कोई सत्ता विरोधी लहर होती, तो मतदान प्रतिशत बढ़ता, लेकिन इस बार मतदान में केवल 1% की गिरावट आई है। भाजपा का दावा है कि वह 30 सीटों पर कांग्रेस के साथ सीधी टक्कर में है।
इनेलो-बसपा गठबंधन ने पिछले चुनाव की तुलना में सुधार की उम्मीद जताई है। इनेलो को पिछले चुनाव में केवल एक सीट मिली थी, लेकिन इस बार उन्हें तीन से पांच सीट मिलने की संभावना है। वहीं, जनता जननायक पार्टी (जजपा) को लेकर अनुमान है कि उनका वोट बैंक कांग्रेस और इनेलो में शिफ्ट हो रहा है।
आम आदमी पार्टी ने हरियाणा में अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन एग्जिट पोल के अनुसार उनकी स्थिति कमजोर नजर आ रही है। पार्टी के पास न तो कोई स्थानीय चेहरा था और न ही पिछले चुनाव में उनका प्रदर्शन अच्छा था। इसके चलते, उन्हें इस चुनाव में कोई खास सफलता मिलने की उम्मीद नहीं है।
चुनाव परिणामों का आकलन करते हुए, यदि कांग्रेस को 40% से अधिक वोट मिलते हैं, तो वे सरकार बनाने में सफल हो सकते हैं। पिछले चुनावों के ट्रेंड के अनुसार, कांग्रेस को तब ही स्पष्ट बहुमत मिल सका है जब उनका वोट प्रतिशत 40% से ऊपर रहा।
भाजपा का हालिया प्रदर्शन भी चुनावी परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यदि भाजपा की स्थिति में सुधार होता है, तो वे भी सरकार बनाने में सफल हो सकते हैं। पार्टी के अंदर मजबूत कैडर और बूथ प्रबंधन के कारण उनके पास एक सकारात्मक स्थिति हो सकती है।
कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए खींचतान बढ़ रही है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो सबसे मजबूत दावेदार माने जाते हैं, के अलावा दीपेंद्र हुड्डा और कुमारी सैलजा भी इस दौड़ में शामिल हैं।
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