हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों के बीच डेरा सच्चा सौदा ने अपनी गतिविधियाँ तेज कर दी हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण में बड़ा उलट फेर संभव है। सिरसा के डेरे के अनुयायियों का झुकाव कुछ सीटों पर कांग्रेस की ओर देखने को मिल रहा है, जो चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम के पैरोल पर आने के बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है। सिरसा, ऐलनाबाद, डबवाली और कालांवाली में डेरा समर्थकों की भूमिका चुनावी नतीजों में अहम मानी जाती है। पूर्व में, डेरा ने कांग्रेस को समर्थन दिया था, और इस बार भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अनुयायी कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में नजर आ सकते हैं।
डेरा का समर्थन किस प्रत्याशी को मिलेगा और किसे नकारा जाएगा, इसे लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। सिरसा, हिसार, और फतेहाबाद क्षेत्रों में डेरा की गतिविधियों ने प्रत्याशियों के बीच हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डेरा के समर्थकों के वोट से किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार तय हो सकती है।
डेरा ने इस बार रणनीति के तहत पार्टी के बजाय प्रत्याशियों को समर्थन देने का निर्णय लिया है। लोकसभा चुनावों में कुमारी सैलजा के डेरा समर्थकों के बूथों से जीतने ने इस बात को और पुख्ता किया है। हाल ही में, कई नामचर्चाएं भी रद्द कर दी गईं, जिससे राजनीतिक रुख साफ नहीं हो पा रहा है।
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