पंजाब

CM भगवंत मान ने कई मुद्दों पर दी अपनी प्रतिक्रिया, बोले CM मान: “किसी को चाहिए SYL, किसी को चंडीगढ़”

CM भगवंत मान ने कई मुद्दों पर दी अपनी प्रतिक्रिया

 

नॉर्थ जोन काउंसिल की अहम बैठक के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पड़ोसी राज्यों और केंद्र सरकार पर सीधे सवालों की बौछार कर दी। CM मान ने कहा कि, पंजाब का सबसे बड़ा संकट पानी है, लेकिन पड़ोसी राज्य हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल लगातार नए दावे पेश कर रहे हैं।

कहीं SYL नहर की मांग, कहीं शानन प्रोजेक्ट, तो कहीं चंडीगढ़ पर अधिकार जता रहे हैं। CM मान ने कहा कि, पंजाब को बाढ़ के दौरान भारी नुकसान हुआ, लेकिन केंद्र की तरफ से मिलने वाली 1600 करोड़ रुपए की राहत राशि अब तक जारी नहीं की गई

उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि, “हमसे खाद्यान्न लेने की बात तो सब करते हैं लेकिन जब पंजाब अपने हक की बात करता है तो हमें टाल दिया जाता है”।

CM मान ने सवाल करते हुए कहा कि, “अगर पानी ही पंजाब के पास नहीं बचेगा तो क्या हमारे किसान गमलों में खेती करेंगे?”

CM मान के अनुसार नॉर्थ जोन काउंसिल में कुल 28 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से 11 मुद्दे पानी से जुड़े थे और सभी पंजाब के खिलाफ थे। साथ ही CM मान ने कहा कि, जल समझौतों की 25 साल से समीक्षा ही नहीं हुई और दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य पंजाब के हिस्से पर दावा करते जा रहे हैं

CM मान ने हरियाणा और पंजाब यूनिवर्सिटी विवाद पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने याद दिलाया कि, हरियाणा पहले ही पंजाब यूनिवर्सिटी से अलग हो चुका था। “उस समय बंसीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। तब भी PU को लेकर राजनीति होती थी और आज भी वही खेल जारी है,”।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि, हरियाणा अपने कॉलेजों अंबाला, कुरुक्षेत्र और सहारनपुर—को दोबारा PU से एफिलिएट कराने की कोशिश कर रहा है। CM मान ने सवाल उठाया कि, जब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को A+ रैंकिंग मिली हुई है, तो हरियाणा के छात्र पंजाब के कॉलेजों में क्यों पढ़ने आते हैं।

CM मान ने आरोप लगाया कि, हरियाणा PU की सीनेट और सिंडिकेट पर कब्जा जमाना चाहता है, जिसके कारण सीनेट भंग करनी पड़ी। CM मान ने कहा कि, “मोर्चे चल रहे हैं, आंदोलन चल रहा है, लेकिन कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया,”।

पानी के मुद्दे पर सीएम मान ने पड़ोसी राज्यों पर सीधा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि, हरियाणा यमुना से पानी लेता है, लेकिन जब पंजाब किसी हिस्से की मांग करता है तो साफ मना कर दिया जाता है।

 

उन्होंने कहा कि, “एक तरफ पाकिस्तान है और दूसरी तरफ राजस्थान, हिमाचल, हरियाणा… समझ नहीं आता असली दुश्मन कौन है। शुक्र है जम्मू-कश्मीर यहां नहीं है, नहीं तो वो भी हिस्सा मांग लेता।”

बाढ़ के दौरान पंजाब ने राजस्थान और हरियाणा से पानी लेने की अपील की थी, लेकिन दोनों ने साफ इनकार कर दिया। CM मान ने कहा कि, इस तरह की स्थिति में पंजाब पर संकट और बढ़ जाता है। उन्होंने चंडीगढ़ में अफसरों की तैनाती को लेकर भी नाराज़गी जताई।

मीटिंग के दौरान CM मान ने इन मुद्दों पर दावा किया…वे मीटिंग में साफ तौर पर चंडीगढ़ को पंजाब का हिस्सा घोषित करने की मांग लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, ये 1966 के पुनर्गठन एक्ट में साफ लिखा है।

साथ ही उन्होंने ये भी याद दिलाया कि, 1970 में इंदिरा गांधी और बाद में राजीव-लोंगोवाल समझौते में भी चंडीगढ़ को पंजाब का हिस्सा माना गया था।

उन्होंने कहा कि, पंजाब की 532 किलोमीटर सीमा अंतरराष्ट्रीय बार्डर से लगती है, इसलिए सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से भी चंडीगढ़ का पंजाब के अधीन होना जरूरी है। साथ ही उन्होंने ड्रोन एंट्री रोकने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी लगाने की मांग भी दोहराई।

वहीं, CM मान ने दावा किया कि, इंडस वॉटर ट्रीटी खत्म हो चुकी है। ऐसे में चिनाब, झेलम और कश्मीर की नदियों का पानी पौंग और रणजीत सागर डैम में आएगा। उन्होंने कहा कि, “ये पानी पंजाब से होकर ही गुजरना है। हमें 24 MAF पानी मिलेगा। लेकिन छोटे भाइयों को बसाने के चक्कर में बड़े भाई को उजाड़ना ठीक नहीं।”

साथ ही प्रदूषण पर भी CM मान ने दिल्ली सरकार और केंद्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, एनजीटी के जज ने भी कहा था कि, पंजाब को बेवजह दोषी ठहराया जाता है।

CM मान ने कहा कि, “इस बार तो हमने धान की कटाई शुरू भी नहीं की थी, फिर भी दिल्ली का AQI 400 पार चला गया। चावल पंजाब के लोग खाते भी नहीं। सबसे ज्यादा पानी धान की फसल में जाता है, और उसी पानी को निकालने में पंजाब की मोटरें उतनी ताकत लगा देती हैं, जितनी सऊदी अरब तेल निकालने में लगाता है”।

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