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मेरठ में अनोखा मामला, असली अधिकारी को फर्जी IAS बताकर किया गिरफ्तार

मेरठ पुलिस से जिस शख्स को फर्जी IAS बताकर गिरफ्तार किया अब पकड़े गए राहुल कौशिक अब खुद को असली अधिकारी बताते हुए सामने आए हैं। वहीं, उनके द्वारा किए गए दावों और दस्तावेजों ने इस पूरे मामले को उलझा दिया है और अब इस मामले पर पुलिस के आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

दरअसल, 12 मार्च को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राहुल कौशिक को हिरासत में लिया और दावा किया कि, वह खुद को IAS अधिकारी बताकर फोन कॉल के जरिए अधिकारियों को गुमराह करते है और लोगों को धमकाते है। पुलिस ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे एक बड़ी कामयाबी बताया और साफ कहा कि आरोपी किसी भी सरकारी सेवा में नहीं है।

वहीं, अब इस कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया है। राहुल कौशिक ने मीडिया के सामने आकर पुलिस के दावों को खारिज कर दिया। अब उनका कहना है कि, उन्होंने 2008 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की थी और उन्हें इंडियन पोस्टल सर्विस में चयन मिला था. उन्होंने अपनी ऑल इंडिया रैंक 728 बताई

राहुल कौशिक ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए कई दस्तावेज भी पेश किए। इनमें भारत सरकार के गृह मंत्रालय से जुड़ा पहचान पत्र, ब्यूरो ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज एंड ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र, डाक विभाग का आई कार्ड और उस समय के अखबार की कटिंग शामिल थी, जिसमें UPSC परिणाम प्रकाशित हुआ था। बता दें कि, इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या पुलिस ने बिना पूरी जांच के एक व्यक्ति को फर्जी घोषित कर दिया।

बताए कि, राहुल कौशिक का आरोप है कि 11 और 12 मार्च की रात को अचानक 10 से 12 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और उन्हें बिना स्पष्ट कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया और उन्हें अगले दिन शाम तक थाने में बैठाए रखा गया। उनके मुताबिक, उन्होंने किसी तरह अपने भाई को सूचना दी, जिसके बाद परिवार के सदस्य पहुंचे और कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें घर ले जाया गया।

राहुल ने ये भी कहा कि पुलिस ने उनका पक्ष सुने बिना ही कार्रवाई कर दी। वहीं, अब इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पक्ष भी सामने आता है। मिली जानकारी के अनुसार, राहुल कौशिक पर वर्ष 2017-18 में धोखाधड़ी का आरोप लगा था। जिसके बाद उन्हें पहले निलंबित किया गया और फिर 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि राहुल इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में लंबित है।

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