हरियाणा के भिवानी जिले में स्थित लोहारू सीट ने पिछले कुछ समय से राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। यहां चुनावी दंगल में भाजपा के वित्त मंत्री जेपी दलाल और कांग्रेस के उम्मीदवार राजबीर फरटिया के बीच सीधी टक्कर हो रही है। इस लेख में हम लोहारू की राजनीतिक पृष्ठभूमि, दोनों उम्मीदवारों के कार्य, सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
लोहारू हरियाणा के दक्षिणी छोर पर भिवानी जिले में स्थित है, जो कि 60 किलोमीटर दूर है। इसका नाम उस समय के लोहारों के नाम पर पड़ा, जो जयपुर राज्य के लिए सिक्के बनाते थे। क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से लोहारू छोटा हो सकता है, लेकिन इसका राजनीतिक इतिहास बहुत समृद्ध है। यहां 13 विधानसभा चुनावों में से 7 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है, जबकि भाजपा ने केवल एक बार जीत दर्ज की है।
पिछले चुनाव में जेपी दलाल ने कांग्रेस के सोमबीर को 17,000 वोटों से हराया था। जीत के बाद भाजपा ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया, जबकि 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, वे क्षेत्र में सक्रिय रहे और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी।
जेपी दलाल के विकास कार्यों की क्षेत्र में चर्चा होती है। कई स्थानीय लोग उनकी योजनाओं को सराहते हैं। उदाहरण के लिए, भगत सिंह चौक मार्केट के दुकानदार रोहित बताते हैं कि जेपी दलाल ने नहरी पानी की समस्या का समाधान किया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को फायदा हुआ है।
धर्मवीर सिंह, एक स्थानीय निवासी, ने कहा, “जेपी ने जात-पात का भेदभाव नहीं किया। वे सभी के लिए समान रूप से काम करते हैं।”
हालांकि, कुछ लोग उनसे असहमत भी हैं। राम अवतार, एक स्थानीय निवासी, ने कहा, “भले ही उन्होंने कुछ काम किए हैं, लेकिन भाजपा की सरकार में लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। लोग बदलाव चाहते हैं।”
कांग्रेस उम्मीदवार राजबीर फरटिया एक जाना पहचाना चेहरा हैं। वे दानवीर के रूप में जाने जाते हैं और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए मुफ्त बस सेवा प्रदान करते हैं। वे हर शादी में 5100 रुपये का शगुन भी देते हैं।
फरटिया के सामाजिक कार्यों ने उन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया है। शेर सिंह, एक स्थानीय निवासी, ने कहा, “राजबीर ने कई सामाजिक कार्य किए हैं। उनकी पहचान क्षेत्र में अच्छी है।”
लोहारू की 200,000 की जनसंख्या में जाट बाहुल्य क्षेत्र है। दोनों ही उम्मीदवार जाट समुदाय से हैं, जिससे जाट वोटरों का विभाजन होना तय है। इसके अलावा, गैर-जाट वोटर्स का समर्थन भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण होगा।
कांग्रेस के लिए एक और चुनौती है—भीतरघात। सोमबीर और नरेंद्र राज गागड़वास जैसे अन्य दावेदारों की उपस्थिति ने राजबीर फरटिया के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
लोहारू हलके में श्योराण खाप के 52 गांव हैं, जिनका समर्थन चुनाव के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
कुछ मतदाता अभी भी निर्णय नहीं ले पाए हैं कि वे किसे वोट देंगे। वे देख रहे हैं कि चुनावी हवा किस दिशा में बहती है, और उसी के अनुसार अपना वोट डालेंगे।
लोहारू क्षेत्र की जनसंख्या और वोट बैंक का विस्तृत आंकड़ा:
यह आंकड़ा दर्शाता है कि जाट समुदाय का वोट बैंक बड़ा है, लेकिन इसके साथ ही अन्य जातियों का वोट भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
लोहारू विधानसभा सीट का चुनाव न केवल भाजपा और कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हरियाणा की राजनीति के लिए भी एक मील का पत्थर हो सकता है। यहां की चुनावी राजनीति की गर्मी और विकास के मुद्दे चुनाव के परिणाम को प्रभावित करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विज़न को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी…
राघव चड्ढा समेत 6 सांसदों के पार्टी छोड़ने से आम आदमी पार्टी को बड़ा सियासी…
अप्रैल की शुरुआत से ही देश के कई राज्यों में गर्मी ने तेजी पकड़ ली…
AAP में बड़ी फूट की खबर सामने आई है। 'आम आदमी पार्टी' के संस्थापक सदस्य…
मुंबई, महाराष्ट्र, भारत कुछ लोग सिर्फ दावे करते हैं और कुछ लोग दावे साबित करते…
देहरादून में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली, जहां…