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Baisaran Valley: पहलगाम की बैसरन घाटी की दर्दनाक तस्वीर, आतंकी हमले में पीड़ितों की आपबीती

Baisaran Valley: पहलगाम की बैसरन घाटी की दर्दनाक तस्वीर

मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाली पहलगाम की बैसरन घाटी… जहां दहशतगर्दों ने खुनी खेल को अंजाम दिया… इस घाटी में आज भी बेगुनाहों की चीख-पूकार सुनाई दे रही है…क्योंकि, मौत का वो मंजर, भयानक ही इतना था…जो हर किसी की रुह को रुला दें…

इस आतंकी हमले ने सिर्फ 26 बेगुनाह भारतीयों को नहीं छीना, बल्कि परिवार की उम्मीद, मां का लाल, बहन का अभिमान और पत्नी का सहारा छीन लिया… और अब बचा है, आंसूओं का सैलाब, सीने में ग़ुस्सा और जहन में एक सवाल, कि, ऐसा हुआ ही क्यों….?

पहलगाम आतंकी हमला…

दर्द और तकलीफ की ऐसी कहानी है, जिसे बयान करते हुए, शब्द भी चूकने लग जाते हैं… गला रुंधने लगता है…और आंखे नम हो जाती हैं…
22 अप्रैल 2025 का वो दिन, जब बैसरन घाटी में पर्यटक हसीनवादियों का आनंद ले रहे थे, उस वक्त आर्मी की वर्दी में आए आतंकियों ने वहां मौजूद पर्यटकों से उनका धर्म पूछा, कलमा पढ़वाया…

जिसका एक ही मकसद था कि, अपनी पहचान बतानी होगी कि, कौन मुस्लमान है कौन हिंदू… और जो-जो हिंदू थे, उनको चुन-चुन कर गोलियों से भून दिया… वो भी उनके परिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने… कैसा रहा होगा वो मंजर…जिसे सोचने भर से ही दिल-दहल जाता है….

आज हम आपको पहलगाम आतंकी हमले की चुनिंदा दर्द भरी कहानी बता रहे हैं, जिसे सुनकर आपका दिल भी पसीज जाएगा…
बात करें, मनीष रंजन मिश्रा की,

मनीष रंजन मिश्रा

मनीष रंजन मिश्रा IB ऑफिसर थे, जो अपनी पत्नी और बच्चों संग छुट्टियां मनाने पहलगाम गए थे. 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने नाम पूछा और बच्चों के सामने गोली मार दी.

पहलगाम तागे हाइलांग

पहलगाम तागे हाइलांग इंडियन एयरफोर्स में ऑफिसर थे, जो अरुणाचल से अपनी पत्नी के साथ पहलगाम घूमने आए थे, आतंकियों ने उनके कपड़े उतरवाए, धर्म पूछा और उनकी पत्नी के सामने गोली मार दी.

नीरज उधवानी

जयपुर के रहने वाले नीरज उधवानी को 32 साल में आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया, नीरज का परिवार उनकी शादी की प्लानिंग कर रहा था…अब उनका परिवार बदहवास है…

चंद्रमौली

विशाखापट्टनम के रहने वाले चंद्रमौली अपने परिवार के 6 लोगों के साथ पहलगाम धूमने आए थए, जिनमें से अब 5 जिंदा है, आतंकियों की गोलियों ने चंद्रमौली की जान ले ली.

महाराष्ट्र के डोंबिवली के तीन दोस्त

महाराष्ट्र के डोंबिवली के तीन दोस्त अपने परिवारों के साथ कश्मीर घूमने आए थे. जिन्हें आतंकियों ने निशाना बनाया और एक-एक कर गोली मार दी.
सुशील नथानियल

इंदौर के रहने वाले सुशील कुमार नथानियल LIC मैनेजर थे. दूसरों का बीमा कराते थे ताकि उनके परिवारों को सुरक्षा मिल सके. लेकिन उन्हें क्या पता था कि वो खुद इस पहलगाम की ट्रिप के दौरान आतंकियों की गोली का शिकार हो जाएंगे.

आपको हमने पहलगाम आतंकी हमले की कुछ चुनिंदा दर्द भरी कहानी बताई… लेकिन, अब हम आपको बताएंगे उन लोगों की आपबीती, जो पहलगाम आतंकी हमले के दौरान बैसरन घाटी में मौजूद थे… जिनके सामने, उनके अपनों को दहशतगर्दों ने मौत के घाट उतार दिया…

सबसे पहले बात करते हैं, पहलगाम आतंकी हमले के दौरान अपने पति को खोने वाली जेनिफर नथानियल की, जो अपने परिवार के साथ घूमने गईं थीं, लेकिन इस यात्रा ने उन्हें जीवन भर का दर्द दे दिया… जेनिफर ने बताया,

‘आतंकियों ने गोली मारने से पहले मेरे पति को कलमा पढ़ने को कहा था. मेरे पति ने उन्हें कहा कि, वो ईसाई हैं और उन्हें कलमा पढ़ना नहीं आता. आतंकी हमले के दौरान मची अफरा-तफरी के बीच मैं जमीन पर गिरकर बेहोश हो गई थीं. होश में आने पर मैंने ये भी देखा कि, दो हमलावर एक-दूसरे के फोटो खींच रहे थे.

इन हमलावरों ने जींस और टी-शर्ट पहन रखी थी, जबकि एक अन्य हमलावर ने कश्मीरियों का पारंपरिक लम्बा कपड़ा पहन रखा था.’’
पहलगाम आतंकी हमले में इंदौर के सुशील नथानिएल की मौत हो गई. उनके बेटे ऑस्टिन ने बताया कि,

हमलावरों में 15 साल तक के नाबालिग लड़के भी थे, जिनके सिर पर कैमरे लगे थे और वे सेल्फी ले रहे थे.

आतंकियों ने पहले धार्मिक पहचान पूछी और ‘कलमा’ पढ़ने को कहा। पहचान के बाद लोगों को गोली मार दी. और अपनी आंखों के सामने छह लोगों को मरते देखा.

वहीं, हरियाणा के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी ने बताया कि,

बैसरन घाटी में, मैं अपने पति के साथ भेलपुरी खा रही थी। एक आदमी आया और कहा ये मुस्लिम नहीं है, फिर गोली मार दी.

वहीं, शहीद नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के घर जब हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहुंचे तो, तो विनय की बहन सृष्टि उनके सामने फूट-फूट कर रोने लगी, बहन सृष्टि ने मुख्यमंत्री के सामने गुहार लगाई, आई वांट देम टू बी डेड यानी के मैं चाहती हूं वो आतंकी जिंदा न रहे, जिसने मेरे भाई को मारा, मुझे उसका सिर चाहिए. इस पर सीएम सैनी ने भरोसा दिलाया-वो मरेगा जिसने मारा, आपके परिवार को न्याय जरूर मिलेगा.

वहीं, पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए कानपुर के शुभम द्विवेदी के घर में मातम का माहौल है. शुभम की असमय मौत से हर कोई दुखी है… शुभम की पत्नी ऐशान्या का बुरा हाल है और वो बार-बार कह रहीं हैं-

मेरा शुभम वापस ला दो. वो अच्छा इंसान था. उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?

ऐशान्या की आंखें रो रोकर सूख चुकीं हैं. वो आसपास मौजूद लोगों से बार-बार कह रही है कि,

काश हम लोग कश्मीर नहीं गए होते तो, आज मेरा शुभम मेरे पास होता. कश्मीर से मैं तो वापस आ गई, लेकिन मेरा शुभम कभी वापस नहीं आएगा. अब मैं किससे अपनी बात शेयर करूंगी? किसको अपना दुख दर्द बताउंगी?

वहीं, इस हमले में अपने पति को खोने वाली पुणे की एक महिला ने बताया कि,

जब हमलावरों को पुरुषों से कलमा पढ़ने के लिए कहते देखा तो उन्होंने और समूह की अन्य महिलाओं ने तुरंत अपने माथे से बिंदी हटा दी और अल्लाहु अकबर कहना शुरू कर दिया. फिर भी अपनी धार्मिक पहचान छिपाने के ये प्रयास विफल हो गए, क्योंकि बंदूकधारी आतंकवादियों ने महिला के पति और उसके मित्र को भी नहीं बख्शा.

इस आतंकी हमले में मारे गए लोगों में, से एक स्थानीय नागरिक सैयद आदिल हुसैन शाह भी था, जो टूरिस्ट की जान बचाने के लिए आतंकियों से हथियार छीनने की कोशिश करने लगा… लेकिन, आतंकियों ने उसे भी मार दिया, बेशक वो मुस्लमान था, फिर भी वो अपनी जान की परवाह किए बिना, आतंकियों से भिड़ गया और अपनी जान गंवा दी…

इस वाक्या से ये बात तो समझ आती है कि, धर्म से बड़ी इंसानियत होती है… और ये इंसानियत हर किसी के लिए मायने नहीं रखती, क्योंकि, एक तरफ वे आतंकी थे, जिन्होंने धर्म पूछकर लोगों को इसलिए मार दिया क्योंकि वे मुस्लमान नहीं थे… और दूसरी तरफ पहलगाम का ही रहने वाला सैयद आदिल हुसैन शाह, जिसके लिए इंसानियत मायने रखती थी… लेकिन पहलगाम की बैसरन घाटी में मौत का तांडव करने वाले आतंकी थे, उनके लिए इंसानियत से बड़ा धर्म रहा होगा…. और ऐसे दहशतगर्दों को कल्पना से भी बड़ी सजा मिलनी चाहिए…

Kirti Bhardwaj

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