उत्तर प्रदेश में पिछले 37 दिनों में तीन गंभीर घटनाएं हुई हैं, जो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही हैं। इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित कर दिया है और अब जांच में तेजी लाई जा रही है। क्या ये घटनाएं किसी बड़े हमले के लिए परीक्षण के रूप में देखी जा रही हैं? आइए, इन घटनाओं पर गौर करते हैं।
भीमसेन स्टेशन के नजदीक कानपुर-झांसी रूट पर रेलवे लाइन पर लोहे की पटरी फंसाई गई थी। इससे साबरमती एक्सप्रेस के इंजन सहित 22 डिब्बे पटरी से उतर गए, जो यात्रियों के लिए गंभीर खतरा था।
कानपुर-कासगंज रेलवे लाइन पर बर्राजपुर स्टेशन से आगे, ट्रैक पर एक भरा एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल भरी शीशी रखी गई थी। कालिंदी एक्सप्रेस के इंजन ने इसे टक्कर मारी, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई।
कानपुर हावड़ा रूट पर प्रेमपुर स्टेशन के आगे, लूप लाइन पर एक छोटा एलपीजी सिलेंडर रखा गया था। यह संभावित रूप से एक ट्रेन पलटाने की साजिश थी।
इन तीनों घटनाओं में कुछ महत्वपूर्ण समानताएँ हैं, जो जांच एजेंसियों को एक संभावित साजिश के बारे में सोचने पर मजबूर कर रही हैं:
इन घटनाओं के बाद, पुलिस, आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स), और जीआरपी (गृह रेलवे पुलिस) ने तात्कालिक कार्रवाई की है।
जीआरपी ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) विश्राम मीणा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोग शरारती तत्वों के रूप में सामने आ सकते हैं।
इन घटनाओं के मद्देनजर, सुरक्षा एजेंसियों को यह डर है कि कहीं ये घटनाएं किसी बड़ी वारदात के लिए ट्रायल तो नहीं हो सकती हैं। इस प्रकार की संभावित साजिशों को रोकने के लिए, निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है:
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