उत्तराखण्ड

हरिद्वार में हुआ सनसनीखेज खुलासा, बांग्लादेशी महिला का बना आधार कार्ड, हरिद्वार में आधार प्रक्रिया पर उठे सवाल।

हरिद्वार में हुआ सनसनीखेज खुलासा

नया आधार कार्ड बनवाना हो या पुराने आधार कार्ड में संशोधन कराना हो, आम नागरिक के लिए ये काम किसी जंग जीतने से कम नहीं है। जरूरी काम के लिए कागजों की इतनी औपचारिकताएं बता दी जाती हैं कि उसे पूरा करना मुश्किल हो जाता है।

झुग्गी-झोपड़ी में रहने और कबाड़ बीनने वाला एक व्यक्ति बड़ी आसानी से बांग्लादेशी महिला व उसके बेटे का आधार कार्ड व पैन कार्ड बनवा लेता है। हालांकि, इस कवायद के पीछे केवल परिवार बसाने के अलावा आरोपित की कोई और मंशा फिलहाल सामने नहीं आई है लेकिन प्रकरण जितना सीधा और साफ लग रहा है, उससे ज्यादा संवेदनशील है।

मोबाइल सिम खरीदने से लेकर राशन कार्ड, बिजली कनेक्शन, बैंक खाता, आय, जाति, मूल निवास प्रमाणपत्र तक के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है। ट्रेन में रिजर्वेशन से लेकर किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने में आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है।

बांग्लादेशी महिला व उसके पति ने पहले आधार कार्ड बनवाया, फिर उसकी मदद से पैन कार्ड प्राप्त किया। यदि वे पकड़ में न आते तो इन दोनों दस्तावेजों के सहारे और दस्तावेज बनने तय थे। कुछ समय बाद शायद महिला व उसके बेटे का सच हमेशा के लिए राज बनकर रह जाता।

इस प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल आधार कार्ड बनने की प्रक्रिया पर है। आम नागरिक के लिए यह प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग महीनों धक्के खाने के लिए मजबूर हैं। चुनिंदा आधार सेंटरों पर इतनी लंबी लाइन है कि टोकन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। टोकन लेने के लिए भी लोग अल सुबह लाइन में लग जाते हैं।

नंबर आने पर नया आधार बनवाने या संशोधन कराने के लिए भी जरूरी औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है। इस केस में संतोष दूबे ने महिला को अपनी पत्नी और उसके बेटे को अपना बेटा बताते हुए बड़ी आसानी से आधार कार्ड व पैन कार्ड बनवा लिए।

हरिद्वार जैसी धर्मनगरी, जहां संवेदनशीलता चरम पर रहती है, वहां इतनी आसानी से बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान मिलना बड़े खतरे की घंटी है।
धर्मनगरी में शहर के बीच और देहात से सटे इलाकों में कबाड़ बीनने वालों की कई बस्तियां हैं। हालांकि, इनमें अधिकतर लोग खुद को बंगाल व असम का निवासी बताते हैं लेकिन, उनके बीच में बांग्लादेशी नागरिक यदि छिपा हो तो उसे पहचाना खुफिया विभाग के लिए भी मुश्किल है। चूंकि बांग्लादेश और बंगाल के निवासियों की भाषा एक जैसी होती है, इसलिए ताजा प्रकरण सामने आने के बाद ऐसी बस्तियों में सघन सत्यापन अभियान चलाना जरूरी हो गया है।

वही हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि ‘हरिद्वार में सत्यापन ड्राइव लगातार चलाया जा रहा है। ऐसी बस्तियों में भी हाल के दिनों में सत्यापन अभियान चलाया गया है। ताजा प्रकरण सामने आने के बाद एक बार फिर ऐसी बस्तियां चिह्नित कर सघन सत्यापन की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी थाना कोतवाली प्रभारियों और खुफिया विभाग को निर्देशित कर दिया गया है।‘

Kirti Bhardwaj

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