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सच होंगी स्कंद पुराण की भविष्यवाणियां, कलियुग के अंत में लुप्त हो जाएंगे धार्मिक स्थल

सच होंगी स्कंद पुराण की भविष्यवाणियां
कलियुग के अंत में लुप्त हो जाएंगे धार्मिक स्थल

आज हम आपको बताने जा रहे हैं… कलियुग से जुड़े कुछ अहम रहस्य…. जिनका उल्लेख स्कंद पुराण में किया गया है….सबसे पहले जानते हैं स्कंद पुराण क्या है…..  हिंदू धर्म के महत्त्वपूर्ण 18 महापुराणों में से एक है, जिसमें न केवल धर्म, आस्था और तप की महिमा का वर्णन है, बल्कि आने वाले युगों की घटनाओं की भविष्यवाणी भी की गई है। तो चलिए जानते हैं कि, कलियुग को लेकर स्कंद पुराण में गहन रूप से क्या बताया गया है कि, इस युग के अंत में किस प्रकार धरती पर धर्म नहीं अधर्म होगा, मानव मूल्यों का पतन होगा, और कैसे पवित्र तीर्थस्थल स्वयं को छुपा लेंगे।

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हर युग के अपने अधिष्ठाता देवता होते हैं, जो उस युग में जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने के लिए अवतरित होते हैं। सतयुग में सत्य और धर्म की सर्वोच्चता थी, त्रेतायुग में यज्ञ और तपस्या, द्वापर में भक्ति और कर्म की प्रधानता रही। लेकिन कलियुग, चारों युगों में सबसे अधिक पतनशील युग माना गया है, जिसमें अधर्म, लालच, पाखंड, और स्वार्थ सबसे अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं।

स्कंद पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि, जब कलियुग अपनी चरम सीमा पर पहुंचेगा, तो समाज में भारी नैतिक गिरावट आ जाएगी…जिसके तहत

 

1-            साधु-संतों का अपमान और उनका नाश होगा।

2-            राजा या शासनकर्ता प्रजा के रक्षक नहीं, बल्कि शोषक बन जाएंगे।

3-            ब्राह्मण वेदों का व्यापार करने लगेंगे।

4-            स्त्रियां व्यभिचार को आमदनी का साधन बनाएंगी।

5-            घरों में स्त्रियां ही प्रधान होंगी, और पारिवारिक संरचना बदल जाएगी।

6-            अधिकांश लोग वाणिज्य और व्यापार में संलग्न होंगे, लेकिन नैतिकता का पतन हो जाएगा।

7-            जल स्रोत सूखने लगेंगे, वर्षा कम हो जाएगी।

8-            लोग पाखंड और ढोंग के जाल में फंसकर धर्म का मर्म भूल जाएंगे।

9-            मनुष्य बिना किसी भय के पाप करने लगेंगा।

यह समय ऐसा होगा जब लोग सिर्फ दिखावे के लिए धार्मिक होंगे, और आस्था केवल शब्दों तक सीमित रह जाएगी। स्कंद पुराण के अनुसार, जब धरती पर अधर्म और पाप की अधिकता बढ़ेगी, तब प्राचीन तीर्थस्थल धीरे-धीरे अदृश्य या अलक्षित हो जाएंगे। ये स्थान किसी नकारात्मक शक्ति द्वारा नष्ट नहीं किए जाएंगे, बल्कि वे अपनी दिव्य ऊर्जा को समेटकर किसी और स्थान पर स्वयं स्थापित हो जाएंगे।

ये स्थल आमजन की दृष्टि से ओझल हो जाएंगे और केवल सच्चे, निर्मल हृदय वाले भक्तों को ही दर्शन देंगे। यह ईश्वरीय निर्णय होगा कि पवित्रता केवल वहीं रह सके जहां उसकी रक्षा की जा सके।

अब आपको बताते हैं कि, बद्रीनाथ और केदारनाथ से जुड़ी भविष्यवाणियों के बारे में…जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है…

कलियुगे क्षये प्राप्ते बदरी नारायणं हरिः।

अपसृत्य हिमवतः कुन्तीकण्ठे स्थिता शिवाः॥

 

इस श्लोक के अनुसार, जब कलियुग का अंतिम चरण आएगा, तब भगवान विष्णु (बद्रीनाथ) और भगवान शिव (केदारनाथ) हिमालय को छोड़कर किसी अन्य स्थान की ओर प्रस्थान करेंगे।

इसका तात्पर्य यह है कि, वर्तमान में स्थित ये दिव्य तीर्थ स्वयं अपनी शक्ति को समेटकर भविष्य बद्री और भविष्य केदार जैसे नए तीर्थस्थलों में स्थानांतरित हो जाएंगे। इन स्थानों तक केवल वही भक्त पहुंच सकेंगे जिनकी श्रद्धा सच्ची और हृदय पवित्र होगा।

स्कंद पुराण के साथ ही लोकमान्यताओं में यह भी कहा गया है कि जोशीमठ स्थित नरसिंह भगवान की मूर्ति के दाहिने हाथ की उंगलियां धीरे-धीरे पतली होती जाएंगी। और जब वह हाथ पूरी तरह टूट जाएगा, तब यह एक संकेत होगा कि बद्रीधाम का युग समाप्त हो गया है। इसके साथ ही बद्रीनाथ के कपाट हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे और भगवान नारायण नई जगह पर “भविष्य बद्री” के रूप में स्थापित होंगे।

स्कंद पुराण की ये भविष्यवाणियां केवल भय दिखाने के लिए नहीं हैं, बल्कि एक आध्यात्मिक चेतावनी हैं कि कलियुग में भी अगर मनुष्य धर्म, सत्य, और भक्ति के मार्ग पर चले, तो ईश्वर के दर्शन संभव हैं। कलियुग के अंत की ये घटनाएं यह संकेत करती हैं कि सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने वालों को ईश्वर कभी नहीं छोड़ते — वे केवल उनसे दूर हो जाते हैं जो केवल दिखावे का धर्म अपनाते हैं।

स्कंद पुराण की भविष्यवाणियां हमें यह समझाती हैं कि धर्म केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि जीवन का मूल है। जब यह मूल हिलता है, तो ईश्वरीय शक्ति भी स्वयं को बचाने हेतु हट जाती है। ऐसे में ज़रूरत है आत्मचिंतन और सच्ची भक्ति की, ताकि हम उन सौभाग्यशाली भक्तों में शामिल हो सकें जो भविष्य के उन दिव्य स्थलों तक पहुंच सकें।

Ritika Bhardwaj

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