'Model shops' of premium liquor will open in Rajasthan
राजस्थान में शराब प्रेमियों के लिए एक नई सौगात की तैयारी है। राज्य सरकार अब शराब बिक्री को पारंपरिक दुकानों से हटाकर एक प्रीमियम और आधुनिक अनुभव में बदलने जा रही है। इसके तहत राज्य आबकारी विभाग ने राज्य के प्रमुख शहरों में 48 ‘मॉडल शराब दुकानें’ खोलने की योजना तैयार की है। यह पहल 2025 से 2029 तक की नई आबकारी नीति का हिस्सा है।
इन दुकानों में से जयपुर में 5, जोधपुर और उदयपुर में 2-2, और माउंट आबू और आबू रोड में 1-1 दुकान खोली जाएगी। शेष 37 दुकानें अन्य शहरों में स्थापित होंगी। आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, माउंट आबू और आबू रोड में मॉडल शॉप के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य 1 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि अन्य शहरों के लिए यह 50 लाख रुपये होगा।
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये दुकानें मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और हाई-फुटफॉल वाले क्षेत्रों में खोली जाएंगी ताकि ग्राहक को एक आरामदायक, वातानुकूलित और व्यवस्थित माहौल में शराब खरीदने का अवसर मिल सके। इन दुकानों का डिजाइन पूरी तरह से वॉक-इन अनुभव आधारित होगा, यानी ग्राहक अंदर जाकर अपनी पसंद से ब्रांड चुन सकेंगे।
जानकारी के मुताबिक इन दुकानों की ऑनलाइन नीलामी 7 जुलाई को होगी, जिसमें भाग लेने के लिए 50,000 रुपये की गैर-वापसी योग्य शुल्क देना होगा। बोली लगाने वाले आधार मूल्य से 10% से अधिक की बढ़ोतरी एक बार में नहीं कर सकेंगे। इन मॉडल दुकानों के लिए जयपुर में न्यूनतम 1,000 वर्ग फुट और अन्य शहरों में 500 वर्ग फुट का स्थान अनिवार्य है।
वहीं, सभी दुकानें पूरी तरह वातानुकूलित होंगी और ग्राहकों को वॉक-इन अनुभव प्रदान करेंगी। पारदर्शिता और सुविधा के लिए POS बिलिंग सिस्टम और होलोग्राम-स्कैनिंग बीप मशीनें अनिवार्य होंगी।
इन दुकानों में केवल प्रीमियम शराब बेची जाएगी, जिसमें 650 मिलीलीटर की बीयर की कीमत 200 रुपये से अधिक और 750 मिलीलीटर की शराब की बोतल की कीमत 1,500 रुपये या उससे अधिक होगी। यह पहल राजस्थान की 2025-2029 की आबकारी और शराब विनियमन नीति का हिस्सा है।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि गुरुग्राम जैसे महानगरों में इस तरह की दुकानें पहले से संचालित हैं। राजस्थान में प्रीमियम ब्रांड्स की अनुपलब्धता का एक बड़ा कारण अपर्याप्त शेल्फ डिस्प्ले रहा है, जिसके चलते कई ब्रांड यहां लॉन्च करने में हिचकते हैं। इस वजह से ग्राहक प्रीमियम शराब खरीदने के लिए अन्य राज्यों में चले जाते हैं। यह योजना उस कमी को दूर करने का प्रयास है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। खासतौर पर गुजरात की सीमा से लगे माउंट आबू और आबू रोड जैसे क्षेत्रों में, जहां शराबबंदी लागू है, इन दुकानों से बेहतर बिक्री की संभावना जताई जा रही है।
आबकारी विभाग का मानना है कि ये मॉडल दुकानें न केवल ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगी, बल्कि राज्य के राजस्व में भी वृद्धि करेंगी।
खासकर गुजरात जैसे शराबबंदी वाले राज्य की सीमा से सटे माउंट आबू और आबू रोड में इन दुकानों से अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
राजस्थान सरकार की यह नई पहल न केवल राज्य के आबकारी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि इससे राज्य के राजस्व, ग्राहक अनुभव, और प्रीमियम ब्रांड्स की पहुंच तीनों में सुधार होने की उम्मीद है।
अब देखना होगा कि 7 जुलाई को होने वाली नीलामी में कौन-कौन हिस्सा लेता है और राजस्थान में शराब खरीदने का चेहरा किस तरह से बदलता है।
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