शक्ति क्या है? किनके कारण सामने आई श्रीदुर्गा सप्तशती

Navratri 2024 : शक्ति एक अदृश्य शक्ति है जो जीवन का सृजन, संचालन और संतुलन बनाए रखती है। जब इस प्रक्रिया में असंतुलन होता है, तो शक्ति जीवन से अपनी ऊर्जा वापस ले लेती है, जिसे विनाश या प्रलय कहा जाता है। शक्ति परिवर्तन का यह चक्र निरंतर चलता रहता है।

दुर्गा सप्तशती:

भारतीय अध्यात्म ने शक्ति को निराकार रूप में पहचाना है और ज्योति स्वरूप में इसकी आराधना की है। इस ज्योति को जब साकार शब्दों में पूजा जाता है, तो उसे देवी, भवानी, मां, अंबा और दुर्गा कहकर पुकारा जाता है। देवी के स्वरूप और शक्ति की अधिष्ठाता की इसी गाथा को पौराणिक कथाओं में दुर्गा सप्तशती के नाम से पिरोया गया है।

दुर्गा सप्तशती का दूसरा अध्याय:

इस अध्याय में महिषासुर मर्दिनी की कथा वर्णित है। महिषासुर एक शक्तिशाली दानव था जिसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवताओं ने त्रिदेवों की सहायता ली और उनकी शक्तियों से देवी दुर्गा का जन्म हुआ।

देवी दुर्गा का जन्म:

देवताओं ने मिलकर ओमकार की ध्वनि का उच्चारण किया और देवी को प्रकट होने के लिए पुकारा। सभी देवताओं के हृदय से एक तेजपुंज निकला और एक साथ मिलकर प्रकाश की पर्वतनुमा आकृति में तब्दील हो गया। धीरे-धीरे यह प्रकाश पुंज मानवीय आकार लेने लगा। भगवान शिव के पुंज से चेहरा बना, विष्णुपुंज से भुजाएं बनीं, ब्रह्माजी से चरण, यम से केश, चंद्रमा से स्तन, सूर्य से नेत्र, पृथ्वी से पृष्ठ भाग, वसुओं से अंगुलियां, कुबेर से नाक, संध्या से भौंहे और वायु से कान बने। इस तरह देवी का स्वरूप सामने आया।

देवी का श्रृंगार और अस्त्र-शस्त्र:

सभी देवताओं ने देवी का श्रृंगार किया और उन्हें तमाम तरह के अस्त्र-शस्त्र दिए। शिवजी ने त्रिशूल, विष्णुजी ने चक्र, ब्रह्मदेव ने स्फटिक माल और कमंडल, समुद्र ने हर अंग के लिए दिव्य रत्न और आभूषण, कमल की फूलमाला, सूर्य ने मुकुट मणि, चंद्रमा ने घंटा, यम ने पाश और कालदंड, वरुण ने धनुष-बाण, इंद्र ने वज्र, विश्वकर्मा ने फरसा-कवच और भाला, अग्नि ने खप्पर, हिमालय पर्वत ने सवारी के लिए सिंह भेंट किया।

देवी दुर्गा और महिषासुर का युद्ध:

देवी दुर्गा ने महिषासुर के साथ भयंकर युद्ध किया। देवी ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से महिषासुर के कई रूपों का विनाश किया। अंत में देवी ने अपनी शक्ति से महिषासुर का वध कर दिया और देवताओं को उनकी शक्ति वापस दिलाई।

दुर्गा सप्तशती का दूसरा अध्याय शक्ति की महिमा का वर्णन करता है। देवी दुर्गा का जन्म और महिषासुर का वध यह दर्शाता है कि शक्ति सदैव अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त करती है।

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