उत्तराखण्ड

UTTARAKHAND: PM पोषण योजना में 1 करोड़ का घोटाला !, शिक्षा विभाग का आउटसोर्स कर्मचारी है मास्टरमाइंड !, शिकायत पर शिक्षा विभाग ने दिए SIT जांच के आदेश

UTTARAKHAND: PM पोषण योजना में 1 करोड़ का घोटाला !

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को चौंका कर रख दिया है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के तमाम दावों के बावजूद एक छोटे से आउटसोर्स कर्मचारी द्वारा करोड़ों की हेराफेरी करना न केवल विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भीतर ही भीतर सिस्टम में कितनी बड़ी लापरवाही व्याप्त है।

यह मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़ा हुआ है, जहां प्रधानमंत्री पोषण योजना (पूर्व में मध्याह्न भोजन योजना) और शक्ति निर्माण योजना में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए, जिसमें एक उपनल कर्मचारी को तीन करोड़ अठारह लाख रुपये की सरकारी धनराशि के गबन का दोषी पाया गया। हैरत की बात यह है कि यह कर्मचारी विभाग में स्थायी नहीं, बल्कि आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत था।

विभागीय जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि यह कर्मचारी वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 की अवधि के दौरान योजनाओं से जुड़ी रकम को ऑनलाइन माध्यम से अज्ञात खातों में ट्रांसफर करता रहा। यह प्रक्रिया इतने सुनियोजित ढंग से की गई कि दो से तीन बार जिला शिक्षा अधिकारियों के बदलने के बावजूद किसी को इस वित्तीय हेराफेरी की भनक तक नहीं लगी। यह तथ्य अपने आप में चिंताजनक है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या विभागीय निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?

शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल मंडल के अपर निदेशक की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई। जांच समिति की रिपोर्ट में उपनल कर्मचारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया, साथ ही उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति की गई।

इसी रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मामले की एसआईटी (Special Investigation Team) जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि एसआईटी जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह छोटा कर्मचारी हो या बड़ा अधिकारी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि एक अकेला कर्मचारी इतने बड़े स्तर पर हेराफेरी कर सकता है, यह मानना मुश्किल है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्या इस कर्मचारी को किसी अंदरूनी सहयोग की सुविधा प्राप्त थी? यदि ऐसा है, तो इससे यह भी जाहिर होता है कि विभाग के भीतर किसी न किसी स्तर पर मिलीभगत रही होगी।

यही वजह है कि शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा है कि जिन बड़े अधिकारियों की निगरानी में यह हेराफेरी हुई, और जिन्हें इतने बड़े वित्तीय घपले की भनक तक नहीं लगी, उनके खिलाफ भी उत्तराखंड सरकारी सेवक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच में सामने आया है कि धनराशि को ट्रांसफर करने के लिए जिन खातों का उपयोग किया गया, वे अज्ञात लोगों के नाम पर थे। इन खातों का पता लगाने और इस फंड ट्रांसफर की पूरी श्रृंखला को खंगालने का कार्य अब एसआईटी करेगी।

इसके साथ ही संबंधित बैंकिंग लेनदेन की भी फोरेंसिक ऑडिट करवाई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह पूरा फर्जीवाड़ा किन माध्यमों और किस तंत्र के सहयोग से संभव हुआ।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि अब तक की जांच में किसी स्थायी विभागीय अधिकारी का नाम सीधे तौर पर सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से यह गबन सालों तक चलता रहा और किसी ने संदेह तक नहीं किया, यह विभागीय लापरवाही का स्पष्ट संकेत है।

यही वजह है कि कई अधिकारी संदेह के घेरे में हैं और जांच के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।

यह मामला सिर्फ वित्तीय हेराफेरी का ही नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की गंभीर विफलता का उदाहरण भी बनकर सामने आया है। एक ओर सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, तो दूसरी ओर उसी सरकार के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये का गबन हो जाता है और किसी को भनक तक नहीं लगती।

यह घटना यह भी बताती है कि निचले स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को यदि सिस्टम में खामियों का पता चल जाए, तो वे किस हद तक इस व्यवस्था का फायदा उठा सकते हैं।

वर्तमान में एसआईटी जांच के आदेश हो चुके हैं और शिक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह है कि जांच के बाद किस स्तर तक जवाबदेही तय की जाती है और क्या वाकई इस मामले में दोषियों को सजा मिल पाती है या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

admin

Recent Posts

दिल्ली में क्यों नहीं रुक रहे बिल्डिंग हादसे? नियमों के बावजूद खड़ी हैं हादसों को दवात देती इमारतें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की घनी आबादी वाले इलाकों में अवैध और कमजोर इमारतों का खतरा…

2 hours ago

शाहजहांपुर: पुलिसवाले ही बन गए किडनैपर, सर्राफा व्यापारी से की रंगदारी

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला…

3 hours ago

मायावती का नया सियासी दांव! आकाश आनंद के बाद ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बड़ा संगठनात्मक बदलाव…

4 hours ago

उत्तराखंड के इन गांवों में पीलिया और डायरिया का कहर, 100 से ज्यादा बीमार, 2 की मौत

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पीलिया और डायरिया के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता…

4 hours ago

11 दिन बाद मलबे से जिंदा निकली महिला, नेपाल में चमत्कारिक रेस्क्यू

नेपाल के नुवाकोट जिले में राहत और बचाव अभियान के दौरान एक बेहद हैरान करने…

2 days ago

मंडी में अधिकारियों पर भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- अब काम दिखना चाहिए

हिमाचल प्रदेश के मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक…

2 days ago