उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार किया है बल्कि समाज के उस चेहरें को भी उजागर किया है, जहां ‘इज्जत’ के नाम पर बेटियों की बलि चढ़ाई जाती है। बड़ौत तहसील के लुहारी गांव में 21 वर्षीय शिवानी की हत्या उसके ही परिजनों द्वारा कर दी गई। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वो अपने ही गांव के पड़ोसी युवक अंकित प्रजापति से प्रेम करती थी और उससे शादी करना चाहती थी।
शिवानी और अंकित पिछले डेढ़ साल से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों ने शादी करने का फैसला भी कर लिया था। परिजनों को जब इस प्रेम प्रसंग की जानकारी हुई तो उन्होंने शिवानी पर घर से निकलने पर रोक लगा दी। शिवानी की जाति कश्यप थी, जबकि प्रेमी अंकित प्रजापति था। यही अंतर परिवार के लिए ‘इज्जत’ का सवाल बन गया और इस ‘इज्जत’ को बचाने के लिए उन्होंने रिश्तों का खून कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि शिवानी के पिता संजीव उर्फ संजू, मां बबीता, भाई रवि और फुफेरी बहन ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना मंगलवार रात की है, जब शिवानी को घर के एक कमरे में बंद कर दिया गया। पहले तो उसे समझाने की कोशिश की गई, लेकिन जब उसने प्रेमी से शादी की जिद दोहराई, तो परिजन हिंसक हो गए।
मां, बाप और फुफेरी बहन ने शिवानी के हाथ-पैर पकड़े और भाई रवि ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद चारों आरोपी करीब एक घंटे तक शव के पास बैठे रहे। इसके बाद शव को रात के अंधेरे में यमुना नदी के किनारे ले जाया गया, वहीं पर जला दिया गया। राख और अस्थियों को भी नदी में बहा दिया गया ताकि कोई सबूत न बचे।
अगली सुबह जब शिवानी का मोबाइल बंद मिला और उसका कुछ पता नहीं चला, तब प्रेमी अंकित ने पुलिस को सूचना दी। उसने पुलिस को बताया कि शिवानी को उसके घरवालों ने बंद कर रखा था और उसे जान का खतरा था। अंकित ने यह भी दावा किया कि शिवानी पहले ही उसे बता चुकी थी कि अगर उसके परिवार वालों को उनके रिश्ते का पता चला, तो वे उसकी हत्या कर सकते हैं।
पुलिस ने तत्काल हरकत में आते हुए शिवानी के घर छानबीन शुरू की। पूछताछ में जब मृतका के पिता संजीव और मां बबीता से सवाल किए गए तो वे टूट गए और जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने पूरी घटना का विवरण बताया कि किस तरह से हत्या की गई, शव जलाया गया और सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
गांव लुहारी में इस घटना को लेकर गहराई से एक बात निकल कर आई कि गांव में पहले से ही इस प्रेम प्रसंग की चर्चा थी। लोगों ने शिवानी के परिवार को लेकर कई बार तंज कसे थे, जिससे परिवार के लोग शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे। आरोपी पिता संजीव ने भी पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि गांव वालों के तानों से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
यह घटना एक बार फिर ऑनर किलिंग की उस परंपरा की ओर इशारा करती है, जहां प्रेम करने वाले युवाओं को जाति, धर्म या सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर मौत के घाट उतार दिया जाता है। भारत में हर साल ऐसे सैकड़ों मामले सामने आते हैं, खासकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में जहां जातीय जटिलताएं और सामाजिक दबाव बहुत मजबूत हैं।
शिवानी की हत्या भी उसी सामाजिक ढांचे का परिणाम है, जहां प्रेम को अपराध समझा जाता है। परिवार ने यह भी नहीं सोचा कि अपनी बेटी को मारकर वे किस कीमत पर अपनी ‘इज्जत’ बचा रहे हैं। यह मामला केवल एक लड़की की हत्या नहीं है, यह समाज में गहराई तक बैठे पितृसत्तात्मक सोच और जातिवादी मानसिकता की एक भयानक मिसाल है।
शिवानी की हत्या के बाद प्रेमी अंकित ने भी अपनी जान को खतरा बताया। उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि अगर उसे कुछ हुआ, तो उसकी हत्या का जिम्मेदार शिवानी का परिवार होगा। उसने बताया कि वह और शिवानी कई बार भागकर शादी करने की सोच चुके थे, लेकिन शिवानी ने परिवार को मनाने की कोशिश की थी। बदले में उसे प्रताड़ना, मारपीट और अंत में मौत मिली।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने मीडिया को बताया कि शिवानी के पिता संजीव और मां बबीता को गिरफ्तार कर लिया गया है। जबकि भाई रवि और फुफेरी बहन अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। उनके खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रेमी अंकित की तहरीर के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201, 120B के तहत केस दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा और इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की सिफारिश की जाएगी।
सामाजिक और कानूनी पहलू
यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की गुहार भी है। ऑनर किलिंग को लेकर सख्त कानून की आवश्यकता है, जिसमें ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई हो और दोषियों को कठोर सजा मिले। केंद्र और राज्य सरकारों को भी ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है।
शिवानी के केस में अगर समय रहते कानून या समाज की कोई संस्था सक्रिय होती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। प्रेम करने का अधिकार भारत के संविधान द्वारा दिए गए नैतिक और वैधानिक अधिकारों में आता है। फिर भी, हर साल कितनी शिवानियां इसी अधिकार के लिए अपनी जान गँवा देती हैं?
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