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टॉपर IAS टीना डाबी का जिला बन गया मिसाल, SIR का काम पूरा करने वाला पहला जिला बना

देशभर के 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी है। इसी बीच राजस्थान के बाड़मेर जिले ने समय सीमा से पहले ही इस अभियान का लक्ष्य पूरा कर एक उल्लेखनीय उदाहरण पेश किया है। 4 नवंबर से शुरू हुए इस राष्ट्रव्यापी अभियान में 4 दिसंबर तक मतदाता सूची के डिजिटाइजेशन और मैपिंग का लक्ष्य निर्धारित था, जिसे बाद में बढ़ाकर 11 दिसंबर किया गया। इसके बावजूद बाड़मेर ने अतिरिक्त समय का इंतजार किए बिना निर्धारित सीमा से पहले ही 100 प्रतिशत से अधिक डिजिटाइजेशन और 98 प्रतिशत मैपिंग कर देशभर के 12 राज्यों में पहला स्थान हासिल किया।

बाड़मेर की यह उपलब्धि सिर्फ प्रशासनिक सफलता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी कुशल प्रबंधन और फील्ड टीमों की मेहनत का परिणाम बताया जा रहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर टीना डाबी ने बताया कि जिले का विशाल क्षेत्रफल और बिखरी जनसंख्या इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती थी। जिले के कई क्षेत्र दूर-दराज में बसे हैं, जहां सड़क सुविधाएँ सीमित हैं और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी कई जगह बाधित रहती है। इसके बावजूद BLO और ERO की टीमों ने हर क्षेत्र तक पहुंच सुनिश्चित की, यहां तक कि कई इलाकों में ऊंट की सवारी करके भी कर्मचारी घर-घर पहुंचे और मतदाताओं का डेटा अपडेट किया।

टीना डाबी के अनुसार, अभियान की शुरुआत से ही प्रशासन ने स्पष्ट रणनीति अपनाई कि फील्ड स्तर के कर्मचारियों, विशेष रूप से BLO को तनावमुक्त रखकर बेहतर परिणाम हासिल किए जाएँ। पिछले वर्षों में अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि BLO पर अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना करते हैं। डाबी ने बताया कि इस बार BLO को अतिरिक्त सहयोग देने के लिए पटवारी, ग्राम सेवक, आशा सहयोगिनी और अन्य कर्मचारियों को मिलाकर चार सदस्यीय टीमें गठित की गईं। इससे कार्यभार का संतुलन बना और फील्ड में गति भी बढ़ी।

बता दें कि, इस समन्वित प्रयास का परिणाम रहा कि जिले में त्रुटियाँ न्यूनतम रहीं और डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया समय से पहले पूरी हो गई। कलेक्टर ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और जिले की टीम ने अनुशासन, समर्पण और लगातार फील्ड वर्क के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया है। उन्होंने जिलेवासियों, BLO, ERO और सभी फील्ड स्टाफ को इस सामूहिक सफलता के लिए बधाई दी।
लेकिन इसी सफलता के बीच एक दर्दनाक खबर ने पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया। धौलपुर जिले से एक बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) की मौत की खबर सामने आई, जिसने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान फील्ड कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, BLO के तौर पर तैनात अनुज गर्ग रविवार को देर रात तक कार्य कर रहे थे। उनके परिवार ने दावा किया है कि वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्यूटी के कारण अत्यधिक दबाव में थे।

उनकी बहन वंदना ने बताया कि शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक अनुज लगातार काम में लगे हुए थे। रात लगभग 1 बजे जब वे मतदाता सूची का काम कर रहे थे, तभी उन्हें बेचैनी महसूस होने लगी। वंदना के अनुसार, अनुज ने उनसे चाय मांगी, लेकिन चाय लेने से पहले ही वे अचानक गिर पड़े। परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की पुष्टि की।
अनुज गर्ग की मौत ने राज्य में BLO की कार्य परिस्थितियों को लेकर बहस छेड़ दी है। फील्ड कर्मचारियों का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे कार्यक्रमों के दौरान उनके ऊपर काम का अत्यधिक दबाव बढ़ जाता है। कई बार समय सीमा कम होती है और फील्ड में कठिन हालात में काम करना पड़ता है, जिससे तनाव बढ़ जाता है।

वहीं, जहां एक ओर बाड़मेर जैसी उपलब्धियां प्रशासन की कुशलता और टीमवर्क का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, वहीं धौलपुर की यह घटना यह भी याद दिलाती है कि ऐसे अभियानों के दौरान फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-परिस्थितियों पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का डिजिटाइजेशन और मैपिंग का कार्य तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, और सीमित संसाधनों में इसे पूरा करना हमेशा आसान नहीं होता।

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