जब भी महंगी धातुओं में निवेश की बात होती है तो सबसे पहले सोना और चांदी का नाम आता है। लेकिन अब एक और धातु तेजी से निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। तांबे यानी Copper की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है और इसका भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
तांबे की बढ़ती मांग, खदानों से सप्लाई में आ रही परेशानियां और अमेरिका की संभावित टैरिफ नीति ने इसके बाजार को काफी प्रभावित किया है। इसके अलावा AI और डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों में बढ़ता निवेश भी कॉपर की मांग को बढ़ा रहा है।
लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME में कॉपर की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। तीन महीने के बेंचमार्क कॉपर फ्यूचर्स में 0.9 फीसदी की तेजी देखी गई और भाव करीब 14,510 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को कॉपर ने करीब 14,533 डॉलर प्रति टन का नया ऑल टाइम हाई बनाया था। यानी तांबे की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी काफी तेज रही है।
कॉपर की तेजी सिर्फ पिछले कुछ दिनों की कहानी नहीं है। इस साल की शुरुआत से ही इसकी कीमत में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक कॉपर की कीमत करीब 16 फीसदी बढ़ चुकी है। खास बात यह है कि मौजूदा भाव कई बड़े ब्रोकरेज हाउस के अनुमान से भी ऊपर निकल गया है।
गोल्डमैन सैक्स ने 2026 की चौथी तिमाही में कॉपर की कीमत करीब 11,200 डॉलर प्रति टन रहने का अनुमान लगाया था। वहीं ड्यूश बैंक ने एक साल की औसत कीमत करीब 12,125 डॉलर प्रति टन रहने की उम्मीद जताई थी। लेकिन कॉपर इन अनुमानों से काफी आगे निकल गया है।
तांबे की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। सप्लाई की समस्या से लेकर दुनिया में बढ़ती मांग तक कई फैक्टर इसके भाव को ऊपर ले जा रहे हैं।
अमेरिका की ओर से रिफाइंड कॉपर के आयात पर टैरिफ बढ़ाए जाने की आशंका ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। इसके चलते कारोबारियों ने अमेरिका में बड़ी मात्रा में कॉपर भेजना शुरू किया। 2026 की पहली छमाही में अमेरिका ने करीब 8.85 लाख टन कॉपर का आयात किया। इससे अमेरिका में कॉपर का स्टॉक बढ़ा, जबकि लंदन मेटल एक्सचेंज के नेटवर्क में उपलब्ध स्टॉक में गिरावट देखने को मिली।
दुनियाभर में कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही है। कई बड़ी और पुरानी कॉपर माइंस में उत्पादन बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। वहीं प्रमुख कॉपर उत्पादक देशों में खनन और ऑपरेशनल चुनौतियां भी सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं। चिली इसका बड़ा उदाहरण है। कॉपर की कीमतों में तेजी के बावजूद वहां अगस्त में कॉपर शिपमेंट एक साल से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गया।
AI की बढ़ती लोकप्रियता भी कॉपर की कीमतों को सपोर्ट कर रही है। AI डेटा सेंटर में बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है और इसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम में कॉपर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा नेटवर्किंग उपकरण, पावर ग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में भी कॉपर की जरूरत होती है।
जैसे-जैसे दुनिया में AI और ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे कॉपर की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है।
कॉपर की कीमतों में तेजी का असर इससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल रहा है। भारतीय शेयर बाजार में Hindustan Copper के शेयर में मंगलवार को करीब 5 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। बाजार में कमजोरी के बावजूद कॉपर से जुड़ा यह शेयर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। इसके अलावा Vedanta और Hindalco Industries के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।
कॉपर को फिलहाल ‘नया सोना’ कहे जाने की एक बड़ी वजह इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ग्रिड, AI और डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों के विस्तार के साथ कॉपर की जरूरत लगातार बढ़ रही है।हालांकि, कॉपर में निवेश करने से पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजार के जोखिम को समझना जरूरी है। मौजूदा तेजी के बावजूद भविष्य की कीमतों को लेकर निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है।
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