लव-लेटर पहुंचाने वाला कबूतर, नाम है शहंशाह

पुराने जमाने में जब मोबाइल फोन, ईमेल और सोशल साइट्स का अस्तित्व नहीं था, तब संदेश भेजने के लिए कबूतर ही एकमात्र माध्यम थे। पहले और दूसरे विश्व युद्ध में भी कबूतरों ने सेना तक संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समय के साथ तकनीक विकसित हुई और चिट्ठी, फोन और इंटरनेट ने संचार के क्षेत्र में क्रांति ला दी, जिसके फलस्वरूप कबूतरों का उपयोग कम हो गया।

लेकिन कुछ लोगों के लिए कबूतर पालना सिर्फ एक शौक है। वे इन खूबसूरत पक्षियों को पालते हैं और उन्हें संदेश ले जाने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।

इंसान और पशु-पक्षियों के बीच अटूट दोस्ती की कई कहानियां प्रचलित हैं। यूपी के आरिफ और सारस पक्षी की दोस्ती इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण है।

इसी तरह, राजस्थान के कोटा शहर में अमन और उनके कबूतर शहंशाह की दोस्ती भी एक अद्भुत कहानी है।

अमन को बचपन से ही कबूतर पालने का शौक है। उन्होंने कबूतरों के छोटे बच्चों को लाकर उन्हें प्रशिक्षित किया। दो साल की प्रशिक्षण के बाद, अमन के कबूतर उसके इशारे पर उड़ान भरने लगे।

अमन के पास अभी दो कबूतर हैं, जिनमें से एक शहंशाह है। शहंशाह अमन का इतना वफादार है कि वह एक इशारे पर आसमान से लौट आता है। वह चौबीसों घंटे अमन के साथ रहता है, चाहे वह घर पर हों या बाहर।

अमन शहंशाह को अपने हाथों से दाना खिलाते हैं और जब वे मोटरसाइकिल चलाते हैं तो शहंशाह उनके साथ उड़ते हुए रेस लगाता है। लोग अमन और शहंशाह की इस अनोखी दोस्ती देखकर चकित रह जाते हैं।

अमन ने बताया कि कबूतर को प्रशिक्षित करने के लिए उसे पांच से छह सप्ताह की उम्र से ही प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाता है। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, उन्हें कुछ दूर ले जाकर छोड़ दिया जाता है, जहां से वे वापस आते हैं। धीरे-धीरे दूरी बढ़ाई जाती है और इस तरह से 10 दिन में कबूतर लगभग 30 किलोमीटर की दूरी से वापस आने में सक्षम हो जाते हैं।

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, संदेश भेजने के लिए पेपर पर मैसेज लिखकर उसे एक कैप्सूल में डालकर पक्षी के पैर में बांध दिया जाता है। कबूतर 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकते हैं और एक बार में 800 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं।

कबूतर के दिमाग में दिशा सूचक होता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि कबूतर के दिमाग में 53 कोशिकाओं का एक समूह होता है जो उन्हें दिशा की पहचान करने और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का निर्धारण करने में मदद करता है।

यह कोशिकाएं ठीक वैसे ही काम करती हैं जैसे कोई दिशा सूचक, दिशाओं की जानकारी देता है। इसके अलावा, रास्ते में आने वाली चीजों की दूरी जानने में भी इससे मदद मिलती है।

admin

Recent Posts

रेल यात्रियों के लिए अलर्ट, 1 जुलाई तक कई एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला रूट, कई ट्रेन रद्द

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूर्व मध्य…

2 hours ago

महाराष्ट्र: परीक्षा से एक दिन पहले लीक हुआ TET पेपर, स्थगित हुई परीक्षा

महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बार फिर…

4 hours ago

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोले बाबा बागेश्वर, ‘रावण ने तो माता सीता चुराई थी, इन्होंने तो…’

राम मंदिर में चढ़ावे (दान) से जुड़ी कथित चोरी के मामले को लेकर अब धार्मिक…

4 hours ago

पाकिस्तान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, कई इलाकों में महसूस हुए झटके

वेनेजुएला में आए जोरदार भूकंप के कुछ समय बाद शनिवार सुबह पाकिस्तान में भी भूकंप…

6 hours ago

आयरलैंड से हार सिर्फ एक मैच नहीं, टीम इंडिया के लिए बड़ा चेतावनी संकेत

टी20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय टीम से उम्मीद थी कि वह उसी आत्मविश्वास…

6 hours ago

जून में क्यों इतना सस्ता हुआ सोना-चांदी ? ये है वजह

जिन लोगों ने जून से पहले सोना और चांदी में निवेश किया था, उनके लिए…

6 hours ago