Delhi Air Pollution: सांस नहीं ले पा रही देश की राजधानी ‘दिल्ली’ !
देश की राजधानी दिल्ली…. इन दिनों सांस नहीं ले पार रही… सुबह हो या शाम बस हांफ रही है…क्योंकि, बढ़ता प्रदूषण दिल्ली का दम घोट रहा है…. हालात दिन पे दिन गंभीर होते जा रहे हैं… जिनको देखते हुए दिल्ली में GRAP-4 लागू कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की इस योजना का सबसे सख्त चरण अब राजधानी में लागू है, जिसमें वाहन, निर्माण और कार्यालय संचालन तक पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
GRAP-4 लागू होने के साथ ही अब दिल्ली में केवल BS-6 इंजन वाली गाड़ियों को ही एंट्री मिलेगी। दिल्ली सरकार ने साफ कहा है कि, BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहन अब राजधानी में नहीं चल पाएंगे। इससे रोजाना दिल्ली आने-जाने वाली लगभग 12 लाख बाहरी गाड़ियों पर असर पड़ा है।
बॉर्डर पर पुलिस और ट्रैफिक विभाग की जॉइंट टीम लगातार गाड़ियों की जांच कर रही है, वहीं नॉन-BS6 इंजन वाले वाहनों को वापस भेजा जा रहा है।
वहीं, दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति भी लागू कर दी है। जिन वाहनों के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी के PUC सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दिया जाएगा। इसके लिए शहरभर के पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर यानी के ANPR कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर उनकी PUC स्थिति की जांच करते हैं।
PUC जांच में असफल वाहनों को पेट्रोल पंप से सीधे लौटा दिया जा रहा है और उनके मालिकों पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना किया जा रहा है। बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त करने की भी तैयारी है।
दिल्ली परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब गैर-BS6 वाहनों की सख्त जांच की जा रही है। बिना वैध प्रमाण पत्र के वाहन पाए जाने पर 20,000 रुपए तक का चालान या यू-टर्न करवाया जा रहा है। इसके अलावा, मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रदूषण मानकों का पालन न करने पर वाहनों को जब्त और निलंबित किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग ने बॉर्डर एंट्री पॉइंट्स पर विशेष दस्ते तैनात किए हैं। गाड़ियों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए CCTV निगरानी और एएनपीआर डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उल्लंघन करने वालों को तुरंत चिन्हित किया जा सके।
GRAP-4 के तहत सभी निर्माण और धूल-उत्पादक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें निर्माण सामग्री और डस्ट जनरेट करने वाले वाहन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहन, जन परिवहन और जरूरी सेवाओं को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
प्रदूषण बढ़ाने वाले एक प्रमुख कारण, ट्रैफिक जाम को नियंत्रित करने के लिए भी नई रणनीति अपनाई गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब गूगल मैप की सहायता से 100 प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर वास्तविक समय में ट्रैफिक प्रबंधन कर रही है। इन स्थानों पर फील्ड टीमें तैनात हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू रहे और इंजन आइडलिंग से होने वाला धुआं कम किया जा सके।
प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी दफ्तरों को निर्देश दिए हैं कि वे 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दें। केवल आवश्यक विभागों और सेवाओं में अपवाद रखा गया है। इस कदम का उद्देश्य शहर में वाहन आवागमन को कम करना है ताकि सड़क पर गाड़ियों की संख्या घटे और वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए प्राइमरी स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर दी गई हैं। सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी कक्षाओं में छात्रों को ये विकल्प दिया गया है कि वे चाहें तो ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी मोड में पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
राजधानी में शिक्षा विभाग की ओर से ये कदम इसलिए उठाया गया है ताकि छोटे बच्चों को दूषित हवा के संपर्क से बचाया जा सके। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी के AQI कई इलाकों में 450 से ऊपर पहुंच गया है, विशेषज्ञों का कहना है कि, हवा में प्रदूषण के स्तर से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं, खासकर अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का सीमित प्रयोग करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें और खुले में शारीरिक गतिविधियों से फिलहाल बचें।
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