सिरसा डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ गवाही अटकी
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे नपुंसक बनाने के मामले की सुनवाई एक बार फिर लटक गई है। पंचकूला की विशेष अदालत में इस केस के एक अहम गवाह की गवाही तय थी, लेकिन वे अमेरिका में रहने के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान नहीं दे सका।
इस की वजह ये रही कि, अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से कोई सहयोग न मिलना। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक जसविंदर कुमार भट्टी ने अदालत में उन सभी दस्तावेज़ों को पेश किया, जिनमें गृह मंत्रालय और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच हुए संवाद का ब्यौरा था।
सीबीआई ने बताया कि, भारत के गृह मंत्रालय ने कई बार रिमाइंडर भेजे, लेकिन अमेरिकी एजेंसी ने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया। इस कारण गवाह की गवाही दर्ज नहीं हो सकी।
गवाह के वकील नवकिरण सिंह ने अदालत में सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए… उन्होंने कहा कि, अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मंजूरी पहले ही दे दी थी, जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
जिसके बाद भी सीबीआई की ओर से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई गंभीरता दिखाई नहीं गई। साथ ही उन्होंने बताया कि, ये मामला पहले ही बेहद संवेदनशील और लंबा खिंच चुका है। अभियोजन पक्ष ने 92 गवाहों की सूची दी थी, जिनमें अभी तक केवल 12 की ही गवाही पूरी हो पाई है।
वकील के अनुसार, जब गवाह स्वयं वीडियो पर बयान देने को तैयार है, तो अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से सम्मन भेजने की जरूरत ही नहीं थी।
बहस सुनने के बाद विशेष मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव ने सीबीआई को कड़े निर्देश दिए।
अदालत ने कहा कि, सीबीआई उच्च अधिकारियों से विचार-विमर्श कर ये स्पष्ट करे कि, क्या अमेरिका में रहने वाले इस भारतीय नागरिक की गवाही बिना अमेरिकी न्याय विभाग की मदद के सीधे भारतीय दूतावास के सहयोग से दर्ज की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि, अगर ऐसा संभव है तो सीबीआई जल्द इसका जवाब देकर अगली कार्रवाई शुरू करे, क्योंकि मामले में पहले ही देरी हो चुकी है।
दरअसल ये पूरा केस दिसंबर 2014 में तब शुरू हुआ जब गवाह की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे। आरोप था कि, डेरा सच्चा सौदा में ‘ईश्वर प्राप्ति’ के नाम पर कई अनुयायियों को सामूहिक रूप से नपुंसक बनाया गया।
इसी मामले में गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सुनवाई चल रही है और कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी भी दर्ज होने बाकी हैं। अमेरिका में मौजूद इस गवाह की गवाही केस के लिए अहम मानी जा रही है। अदालत अब चाहती है कि, आगे किसी भी प्रकार की देरी के बिना ये प्रक्रिया पूरी की जाए।
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